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राहुल गांधी ने IDBI बैंक कर्मचारियों के निजीकरण विरोधी रुख का समर्थन किया

Congress Leader Rahul Gandhi
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को बैंक के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे IDBI बैंक के कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कांग्रेस के कार्यकाल में देश के उद्योगों के निर्माण के लिए IDBI की स्थापना की गई थी। मोदी के कार्यकाल में पहले बोली लगाई गई और फिर कीमत तय की गई। कांग्रेस के समय बैंक बनाए जा रहे थे, जबकि मोदी के समय उन्हें बेचा जा रहा है। मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।”

IDBI बैंक के कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में राहुल गांधी ने कहा, “पिछले साल मार्च में आपमें से कुछ लोग संसद भवन में मुझसे मिलने आए थे। आपने मुझसे एक सीधा सवाल पूछा था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है, जिसे आपने मुनाफे में पहुंचाया है? मैंने इस सवाल को लोकसभा में उठाया। मैंने पूछा कि एक मुनाफे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और इसके कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया।”

कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, “अब सरकार ने IDBI बैंक को कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है। IDBI की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी। एक वाणिज्यिक बैंक बनने का इसका सफर कठिन रहा है, लेकिन आपने चुनौतियों का सामना किया है। सात साल पहले IDBI घाटे में था। पिछले साल इसने नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। यह बदलाव आपकी मेहनत का परिणाम है। सार्वजनिक धन से बना संस्थान जनता का होता है। आज सरकार और LIC के पास इस बैंक की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बिक्री के बाद उनके पास केवल 34 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। वर्ष 2003 में सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि वह IDBI में हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेगी। यह आश्वासन भले ही कानून में दर्ज न हो, लेकिन संसद में किया गया वादा भारत की जनता से किया गया वादा है।”

राहुल गांधी ने कहा, “IDBI के निजी स्वामित्व में जाने के बाद SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण भी समाप्त हो जाएगा। आपकी सेवा शर्तें, जो पहले से ही कमजोर की जा चुकी हैं, अपना आखिरी संरक्षण भी खो देंगी। कांग्रेस ने हमेशा एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र की उस व्यवस्था में विश्वास किया है, जो निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेचने की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के साधन हैं। आपने मुझसे अपने साथ खड़े होने का आग्रह किया था। आज मैं आपके संघर्ष में आपके साथ खड़ा हूं और आपकी सभी जायज मांगों का पूरा समर्थन करता हूं।”

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