New Delhi: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ ने अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी विभाग के भौतिकी विषय की सहायक आचार्य डॉ. अंशु शर्मा को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), भारत सरकार की प्रतिष्ठित रिसर्च प्रमोशन स्कीम (आरपीएस)ः लैब टू मार्केट 2025 के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण शोध परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इन दोनों परियोजनाओं के लिए उन्हें कुल 60 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है, जो विश्वविद्यालय की उभरती शोध क्षमता एवं नवाचार संस्कृति का प्रमाण है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने डॉ. अंशु शर्मा को बधाई दी। कुलपति ने कहा कि एआईसीटीई जैसी प्रतिष्ठित संस्था से दो प्रतिस्पर्धी शोध परियोजनाओं का प्राप्त होना विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के सुदृढ़ होते अनुसंधान पारितंत्र तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
डॉ. अंशु शर्मा को प्रधान अन्वेषक के रूप में 33 लाख रुपये की परियोजना एमओएफ एट सीक्यूडी इलेक्ट्रोड सामग्री आधारित सुपरकैपेसिटर उपकरणों का डिजाइन और विकास के लिए स्वीकृत हुए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स तथा कार्बन क्वांटम डॉट्स आधारित उन्नत इलेक्ट्रोड पदार्थ विकसित कर अगली पीढ़ी के उच्च दक्षता वाले सुपरकैपेसिटर उपकरण तैयार करना है। यह अनुसंधान इलेक्ट्रिक वाहनों, पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स तथा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के लिए अत्याधुनिक एवं कुशल ऊर्जा भंडारण तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इसके अतिरिक्त, डॉ. शर्मा को सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में 27 लाख रुपये की दूसरी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में ग्राफिटिक कार्बन नाइट्राइड आधारित नैनोमैटेरियल्स के पर्यावरणीय अनुप्रयोग भी स्वीकृत हुई है। इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेफाइटिक कार्बन नाइट्राइड आधारित नवीन नैनो-पदार्थ विकसित किए जाएंगे, जिनका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन एवं पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण में किया जाएगा। यह शोध उन्नत नैनो प्रौद्योगिकी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की अनुसंधान प्रोत्साहन योजना (आरपीएस)ः लैब टू मार्केट एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य प्रयोगशाला में किए गए नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करना है। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक प्रभाव वाली बाजार-तैयार प्रौद्योगिकियों के विकास को सुगम बनाकर अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम करना है।
डॉ. अंशु शर्मा नैनो-पदार्थों, ऊर्जा भंडारण उपकरणों, फोटोकैटलिसिस, पर्यावरणीय सुधार तथा उन्नत क्रियात्मक पदार्थों के क्षेत्र की प्रतिष्ठित शोधकर्ता हैं। उनका शोध कार्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं सतत पर्यावरणीय समाधान के लिए नवीन नैनो-संरचित पदार्थों के विकास पर केंद्रित है। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में अनेक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने देश-विदेश के अग्रणी वैज्ञानिकों के साथ शोध सहयोग स्थापित किया है तथा पदार्थ विज्ञान एवं नवीकरणीय ऊर्जा के उभरते क्षेत्रों में युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन भी कर रही हैं।







