New Delhi: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), भारत सरकार के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदायों के विकास, सहभागिता, अवसरों, चुनौतियों और आकांक्षाओं से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत एससी/एसटी सेल के समन्वयक प्रो. अंतरेश कुमार के स्वागत संबोधन से हुई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ आयोग के उप सचिव श्री मनोहर नारायणराव सुकोले, निजी सचिव कुशेश्वर साहू, राहुल, सुश्री रिया, अन्वेषक तथा राहुल यादव, विधिक सलाहकार सहित आयोग का प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहा।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने डॉ. आशा लकड़ा एवं आयोग के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार का युवा संवाद उनकी जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें उपलब्ध अवसरों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए शिक्षा, शोध, नवाचार और रोजगार के नए क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा ने विद्यार्थियों के साथ विस्तृत एवं संवादात्मक चर्चा करते हुए कहा कि युवाओं को अपनी बाहरी व्यक्तित्व एवं दिखावे की अपेक्षा अपनी आंतरिक व्यक्तित्व क्षमता, पहचान, योग्यता और संभावनाओं को समझने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानने और उनमें विश्वास विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रचनात्मक विकास के लिए खेलों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और ‘खेल-खेल में रचनात्मक विकास’ की अवधारणा को विद्यार्थियों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व का विकास भी किया जा सकता है। डॉ. आशा लकड़ा ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे अनुसूचित जनजाति समुदायों को केवल पुस्तकों, रिपोर्टों अथवा द्वितीयक स्रोतों के माध्यम से समझने तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की संस्कृति, परंपराओं, जीवनशैली, चुनौतियों और आकांक्षाओं को वास्तविक रूप में समझने के लिए मैदानी अध्ययन और समुदायों के साथ प्रत्यक्ष संवाद आवश्यक है।

उन्होंने ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों का भ्रमण करने और समुदायों के साथ प्रत्यक्ष रूप से संवाद स्थापित कर उनके जीवन एवं संस्कृति को समझने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. आशा लकड़ा ने उभरते हुए एवं विशिष्ट तकनीकी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की भागीदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विचार करने का आह्वान किया कि कुछ उन्नत तकनीकी एवं विशिष्ट क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत सीमित क्यों है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक, शोध, नवाचार और उच्च शिक्षा के नए एवं उभरते क्षेत्रों में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए और अपनी प्रतिभा एवं क्षमताओं का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए।
कार्यक्रम अत्यंत संवादात्मक रहा। विद्यार्थियों ने शिक्षा, करियर के अवसरों, समुदाय विकास, तकनीक, उच्च शिक्षा एवं व्यक्तिगत विकास से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। डॉ. आशा लकड़ा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। ‘युवा संवाद’ ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को समावेशन, तकनीकी सहभागिता, सांस्कृतिक समझ, शिक्षा एवं युवा सशक्तीकरण के विभिन्न पहलुओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. टी. लोंगकोई ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने डॉ. आशा लकड़ा एवं उनके प्रतिनिधिमंडल द्वारा विश्वविद्यालय में पधारकर विद्यार्थियों के साथ संवाद करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कुलपति, संकाय सदस्यों, आयोजकों एवं विद्यार्थियों के प्रति भी कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके योगदान के लिए धन्यवाद प्रकट किया। कार्यक्रम में प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. एम.एल. मीणा, प्रो. राजेंद्र कुमार मीणा, डॉ. विपिन कुमार, श्री राकेश मीणा, डॉ. मुलका मारुति, डॉ. रश्मि तंवर, डॉ. अनंत राजे बारा, डॉ. सी.एम. मीणा सहित अन्य संकाय सदस्य एवं 200 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।







