नई दिल्ली: आईआईटी कानपुर ने बेंगलुरु स्थित NexPV Energy Systems के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फ़ाउंडेशन (टेक्नोपार्क@IITK) की सदस्य कंपनी Invariance Automation की मदद से संभव हो सका है। इसके तहत Concentrated Photovoltaic (CPV) सिस्टम के लिए भारत का पहला सन सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इस सुविधा के जरिए भारत में ही उत्पादन के अंतिम चरण में CPV मॉड्यूल की जाँच और उनकी क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। फ़िलहाल देश में इस तरह की सुविधा मौजूद नहीं है।
इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफ़ेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को प्रयोगशाला से बड़े स्तर पर उत्पादन तक ले जाने के लिए संस्थान के शोध प्रयासों का हिस्सा है। साथ ही, यह टेक्नोपार्क, आईआईटी कानपुर के उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच स्वदेशी तकनीक के विकास के लिए साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में काम करती है।
आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफ़ेसर आशीष गर्ग ने कहा, “भारत के 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज की तुलना में बहुत बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए सौर ऊर्जा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में देश के भीतर जरूरी क्षमता विकसित करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में परीक्षण सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। किसी तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए यह जरूरी है कि उसकी सही तरीके से जांच और माप की जा सके। CPV मॉड्यूल सामान्य सौर पैनलों से अलग तरीके से काम करते हैं; इसलिए भारत का पहला CPV सिम्युलेटर तैयार करना आईआईटी कानपुर के उस शोध का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य नई तकनीक को प्रयोगशाला से बाहर वास्तविक जीवन तक ले जाना है।”
CPV सिस्टम में लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और अधिक क्षमता वाली सेलों पर केंद्रित किया जाता है। इन सेलों में अर्धचालक की कई परतें एक के ऊपर एक होती हैं। हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को ग्रहण करती है। ये सेल पैनल के केवल लगभग 0.1% हिस्से में होते हैं, जिससे सामान्य सौर पैनलों की तुलना में सेलों के लिए ज़रूरी जगह 99% कम हो जाती है।
NexPV Energy Systems के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर. ने कहा, “भारत में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 168 GW को पार कर गई है, लेकिन देश में solar cells का उत्पादन अभी भी मॉड्यूल की तुलना में बहुत कम है और अब सौर सेल के लिए अनिवार्य प्रावधान लागू होने के बाद यह अंतर सौर ऊर्जा के विस्तार को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। CPV में सामान्य सौर पैनल की तुलना में सेलों के लिए एक प्रतिशत से भी कम जगह की जरूरत होती है और हमारी प्रणालियों को लगाने के लिए लगभग आधी जगह चाहिए होती है। इससे भारत के उन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के लिए एक नया विकल्प मिल सकता है, जहां सूर्य की सीधी रोशनी पड़ती है। देश में ही CPV सिम्युलेटर उपलब्ध होने से बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
मौजूदा सन सिम्युलेटर सामान्य सौर पैनलों के लिए बनाए गए हैं। वहीं, CPV मॉड्यूल केवल सीधी और समानांतर सूर्य की रोशनी में काम करते हैं। इनमें बहुत सीमित जगहों से आने वाली रोशनी ही पहुंच सकती है और सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्सों के संतुलन का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। आईआईटी कानपुर की टीम ऐसा सिम्युलेटर तैयार करेगी, जो इन सभी परिस्थितियों को सटीक रूप से तैयार कर सके। आगे चलकर Invariance Automation इस प्रणाली को शुरुआती मॉडल से लेकर उत्पादन स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रमुख निर्माण साझेदार के रूप में काम करेगी।







