New Delhi: भारत ने 6जी नेतृत्व और सुरक्षा के लिए ‘कार्रवाई के आह्वान’ का समर्थन किया है। इसके साथ ही भारत समान विचारधारा वाली उन सरकारों के एक समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने खुलेपन, अंतर-संचालनीयता, सुरक्षा, सुदृढ़ता, संसाधन दक्षता और नवाचार-आधारित प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों पर वायरलेस संचार की छठी पीढ़ी को आकार देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
यह पहल केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के उस विजन को आगे बढ़ाएगी, जिसमें उन्होंने सदैव इस बात पर जोर दिया है कि भारत 6जी के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी द्वारा देश को प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ता से प्रौद्योगिकी मानक निर्धारित करने वाले देश में बदलने पर दिए गए जोर के महत्व को भी रेखांकित करती है।
इस घोषणा के महत्व पर जोर देते हुए श्री सिंधिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटनाक्रम पर अपने विचार साझा किए।
दूरसंचार विभाग ‘कार्रवाई के आह्वान’ के तहत भारत की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगा और संबंधित सरकारी एजेंसियों, उद्योग, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के साथ आवश्यक अनुवर्ती गतिविधियों के समन्वय करने की जिम्मेदारी निभाएगा। भारत उन अन्य सरकारों के साथ इस पहल में शामिल हुआ है, जिन्होंने ‘कार्रवाई के आह्वान’ की पुष्टि की है। इनमें कनाडा, कोस्टारिका, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, होंडुरास, इटली, जापान, लातविया, नॉर्वे, पैराग्वे, कोरिया गणराज्य, रोमानिया, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
इस समर्थन की घोषणा 1-2 सितंबर 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका की जी20 अध्यक्षता के अंतर्गत अमरीका के उत्तरी कैरोलिना में आयोजित जी20 नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक के इतर की गई। इस घोषणा के अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग ितथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य सचिव श्री हॉवर्ड लटनिक ने हाथ मिलाकर इस अवसर को चिन्हिृत किया।
‘कार्रवाई के आह्वान’ के तहत भाग लेने वाली सरकारों ने इस बात की पुष्टि करती हैं कि सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना प्रौद्योगिकीय प्रतिस्पर्धात्मकता, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है तथा उन्नत दूरसंचार नेटवर्क इस अवसंरचना का प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ इसका केंद्र भी हैं। इस पहल में यह स्वीकार किया गया है कि अगली पीढ़ी के नेटवर्क प्रमुख आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों तथा महत्वपूर्ण सेवाओं के वितरण का आधार होंगे। वैश्विक स्तर पर परस्पर जुड़े संचार तंत्र साइबर, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसलिए नेटवर्क की सुरक्षा और सुदृढ़ता के लिए मजबूत आधारभूत मानक सुनिश्चित करना साझा जिम्मेदारी है। इसमें यह भी माना गया है कि 6जी के भविष्य को आकार देने के लिए उद्योग, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के सहयोग से समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
‘कार्रवाई के आह्वान’ में भाग लेने वाली सरकारों के लिए चरणबद्ध कार्यों का प्रावधान किया गया है। एक महीने के भीतर प्रत्येक सरकार को 6जी विशेषज्ञ संपर्क अधिकारियों की पहचान और नियुक्ति करनी होगी, संपर्क समूह के साथ संचार के प्रबंधन करने वाली एजेंसी निर्धारित करनी होगी तथा संबंधित उद्योग और शैक्षणिक हितधारकों की एक प्रारंभिक सूची तैयार करनी होगी। तीन महीने के भीतरसरकारों को दूरसंचार क्षेत्र के साथ जुड़कर सुरक्षित और अंतरसंचालनीय 6जी के उभरते परिदृश्य का मानचित्रण करना होगा, नेतृत्व के मार्ग में आने वाली बाधाओं की पहचान करनी होगी, अपने निष्कर्षों पर विचार करने के लिए बैठक आयोजित करनी होगी तथा 6जी प्रतिस्पर्धात्मकता को समर्थन देने वाले आर्थिक, राजनीतिक और वित्तीय संसाधनों की पहचान शुरू करनी होगी। छह महीने के भीतर सरकारों को विशेषज्ञ स्तर पर दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित, सुदृढ़, टिकाऊ और नवोन्मेषी 6जी आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन देने की रणनीति तैयार करनी होगी तथा इस बात पर विचार करना होगा कि 6जीनेतृत्व और सुरक्षा को राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय रणनीतियों में किस प्रकार शामिल किया जा सकता है। बारह महीने के भीतर भागीदारों को 2027 में व्यक्तिगत रूप से बैठक आयोजित करनी होगी, जिसमें प्रगति की समीक्षा, प्राप्त अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यपणालियों का आदान-प्रदान तथा संबंधित उद्योग हितधारकों के साथ अगले वर्ष के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित की जाएंगी।
सहयोग के लिए पहचाने गए अन्य क्षेत्रों में शामिल हैं – 6जी अनुसंधान और विकास पर समन्वय और सूचना-साझा करना; वैश्विक बाजारों में सुरक्षित और सुदृढ़ 5जी और 6जी प्रौद्योगिकियों की तैनाती का समर्थन करने के लिए व्यापार और विकास वित्त एजेंसियों के बीच सहयोग; दूरसंचार क्षेत्र के निवेश से जुड़े तकनीकी और रणनीतिक साइबर सुरक्षा जोखिमों का आकलन; आपूर्ति श्रृंखला के विकास और कमजोरियों पर अधिक पारदर्शिता; औद्योगिक, वाणिज्यिक, सुरक्षा और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए 5जी प्रणालियों की पूरी क्षमता का उपयोग और मानक विकास संगठनों में मजबूत सुरक्षा मानकों साहित वैश्विक 6जी मानकों को आकार देने के लिए उद्योग के साथ काम करना।
‘कार्रवाई के आह्वान’ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इसमें भागीदारी से किसी भी सरकार के अधिकार पर कोई बाध्यता या सीमा नहीं लगती है। प्रत्येक सरकार उद्योग प्रेरित मानक निकायों के संबंध में अपनी स्वतंत्र स्थिति अथवा स्वायत्तता बनाए रखते हुए निर्णय ले सकती है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक भागीदार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम उसकी अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, संसाधनों और क्षमताओं के अनुसार अलग-अलग होंगे। साथ ही, उद्योग के नेतृत्व वाले मानकीकरण मंचों में पहले से चल रहे तकनीकी कार्यों की पुनरावृत्ति से बचने की सलाह दी गई है।
भारत उन अन्य सरकारों के साथ इस पहल में शामिल हुआ है, जिन्होंने ‘कार्रवाई के आह्वान’ की पुष्टि की है। इनमें कनाडा, कोस्टा रिका, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, होंडुरास, इटली, जापान, लातविया, नॉर्वे, पैराग्वे, कोरिया गणराज्य, रोमानिया, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
दूरसंचार विभाग ‘कार्रवाई के आह्वान’ के तहत भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाएगा और संबंधित सरकारी एजेंसियों, उद्योग, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के साथ आवश्यक अनुवर्ती गतिविधियों का समन्वय करेगा।
भारत की इस भागीदारी का आधार देश में पहले से विकसित मजबूत घरेलू व्यवस्था है, जिसमें भारत 6जी विजन, भारत 6जी एलायंस तथा स्वदेशी 4जी और 5जी प्रौद्योगिकी स्टैक शामिल हैं। आत्मनिर्भर भारत के विजन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप ‘कार्रवाई के आह्वान’ के तहत भारत की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण और स्पेक्ट्रम से संबंधित मंचों पर भारत द्वारा किए जा रहे कार्यों को पूरक बनाएगी। साथ ही, इससे इन मंचों पर भारत के स्वतंत्र रुख पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।






