नई दिल्ली: वुड मैकेंज़ी की नवीनतम रिपोर्ट “इंडियाज़ डेटा सेंटर लैंडस्केप: पावरिंग द डिजिटल इकोनॉमी” के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर बाजार संरचनात्मक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है, जिससे देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचा निवेश के सबसे आकर्षक अवसरों में से एक बन रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता 2025 में 2.2 गीगावाट (GW) से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट होने का अनुमान है। इस दौरान इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) लगभग 40% रहने का अनुमान है। इसी अवधि में एआई-समर्पित क्षमता 275 मेगावाट (MW) से बढ़कर 6,546 मेगावाट होने का अनुमान है, जो लगभग 24 गुना वृद्धि होगी। हाइपरस्केल क्लाउड प्रदाताओं, एंटरप्राइज डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण कंप्यूटिंग अवसंरचना की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
वुड मैकेंज़ी के रिसर्च एसोसिएट सौहार्द्य पाल ने कहा, “भारत का डेटा सेंटर बाजार अब एक संरचनात्मक निवेश अवसर बन चुका है। हाइपरस्केल निवेश, एआई वर्कलोड में वृद्धि और एक दशक के नीतिगत समर्थन ने भारत को एशिया-प्रशांत के किसी भी बाजार के बराबर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में पहुंचा दिया है। अब डेवलपर्स और निवेशकों के लिए सवाल यह नहीं है कि भारत में प्रवेश करना है या नहीं, बल्कि यह है कि कहां और कैसे प्रवेश करना है।“

डिजिटल अर्थव्यवस्था से बढ़ रही अवसंरचना की मांग
भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था डेटा सेंटर क्षमता की अभूतपूर्व मांग को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2025 में इसकी अनुमानित कीमत 32 लाख करोड़ रुपये (₹32 ट्रिलियन) है और यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 12% का योगदान देती है। देश में 1.03 अरब से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर महीने लगभग 22 अरब यूपीआई (UPI) लेनदेन होते हैं। वहीं, भारत का घरेलू एआई बाजार 2032 तक 11.7 लाख करोड़ रुपये (₹11.7 ट्रिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग अवसंरचना की मांग और बढ़ेगी।
वुड मैकेंज़ी के अनुसार, डेटा सेंटरों की बिजली मांग 2025 के 10 टेरावाट-घंटे (TWh) से बढ़कर 2040 तक 20 गुना हो जाएगी और तब यह देश की कुल बिजली मांग का 7% हिस्सा होगी।
छह रणनीतिक केंद्र विकास की अगली लहर को देंगे गति
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में महाराष्ट्र और तमिलनाडु देश की स्थापित आईटी लोड क्षमता का लगभग 65% हिस्सा रखते हैं। हालांकि, अगले चरण में निवेश का विस्तार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक तक होने की उम्मीद है।
इन उभरते बाजारों में अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) और गूगल जैसे वैश्विक हाइपरस्केल प्रदाताओं के साथ-साथ घरेलू ऑपरेटर अडानीकॉननेक्स (AdaniConnex) भी बड़े निवेश कर रहे हैं। अडानीकॉननेक्स ने 2.6 गीगावाट क्षमता की विकास पाइपलाइन की घोषणा की है।
रिपोर्ट में एक विस्तृत हब अट्रैक्टिवनेस इंडेक्स भी शामिल है, जिसमें बिजली लागत, स्थिरता, अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र और नीतिगत समर्थन जैसे निवेश एवं परिचालन मानकों के आधार पर भारत के डेटा सेंटर बाजारों का मूल्यांकन किया गया है।
बिजली रणनीति बनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त का प्रमुख आधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी लागत पर बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर विकास का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन गई है और इसने भूमि तथा पूंजी को पीछे छोड़ दिया है।
कैप्टिव बिजली उत्पादन और दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौते (PPA) डेवलपर्स की पसंदीदा रणनीति बनते जा रहे हैं। इससे परिचालन लागत कम करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी के कॉर्पोरेट लक्ष्यों को भी समर्थन मिलता है। जिन राज्यों में ओपन-एक्सेस व्यवस्था उदार है और राज्य के भीतर बिजली पारेषण शुल्क प्रतिस्पर्धी हैं, वे नई क्षमता के लिए पसंदीदा केंद्र बनते जा रहे हैं।
वुड मैकेंज़ी की रिसर्च उपाध्यक्ष डॉ. रशिका गुप्ता ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर डेवलपर्स के लिए अब भूमि और पूंजी सबसे बड़ी बाधा नहीं हैं। अब परियोजना स्थल के चयन और समय पर विकास का सबसे बड़ा आधार नोड स्तर पर चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली की उपलब्धता है। जो डेवलपर्स शुरुआती चरण में कैप्टिव उत्पादन या दीर्घकालिक नवीकरणीय पीपीए के माध्यम से अपनी बिजली रणनीति सुनिश्चित कर लेते हैं, उन्हें पूरे परिसंपत्ति जीवनकाल में लागत और स्थिरता का संरचनात्मक लाभ मिलेगा।”
जल प्रबंधन उभर रहा है रणनीतिक जोखिम
रिपोर्ट में जल उपलब्धता को भी इस क्षेत्र के सबसे कम आंके गए निवेश जोखिमों में से एक बताया गया है। एआई वर्कलोड बढ़ने के साथ रैक घनत्व और कूलिंग की आवश्यकता भी बढ़ रही है, जिससे विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे जल-संकट वाले राज्यों में पानी की उपलब्धता डेटा सेंटर स्थल चयन का महत्वपूर्ण मानदंड बन रही है।
वुड मैकेंज़ी के अनुसार, क्लोज्ड-लूप कूलिंग सिस्टम और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक अपनाने वाले डेवलपर्स पहले ही ताजे पानी की खपत कम कर रहे हैं और संभावित भविष्य के नियामकीय प्रावधानों के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
निवेश परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत डिजिटल मांग, अनुकूल नीतिगत समर्थन, नवीकरणीय ऊर्जा बाजार का विस्तार और एआई को तेजी से अपनाए जाने के कारण भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते डेटा सेंटर बाजारों में से एक बन रहा है। हालांकि, दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर्स विश्वसनीय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करने और विकास क्षमता तथा अवसंरचना की मजबूती के बीच संतुलन रखने वाले स्थानों का चयन कितनी सफलतापूर्वक कर पाते हैं।







