New Delhi: स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. ए के पंडा ने 26 जून, 2026 को कंपनी के ओडिशा खान समूह (ओजीओएम) तथा झारखंड खान समूह (जेजीओएम) का दौरा कर खनन कार्यों की समीक्षा की, कर्मचारियों से संवाद किया तथा सेल की निजी खदानों की भावी कार्ययोजना का आकलन किया।
अपने दौरे के दौरान डॉ. पंडा ने बरसूआ, तलडीह, काल्टा, बोलानी, गुआ, किरीबुरू तथा मेघाहातुबुरू लौह अयस्क खदानों के संचालन की समीक्षा की। उन्होंने कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि सभी खनन गतिविधियों में सुरक्षा सर्वोपरी होनी चाहिए।

इसके बाद अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने किरीबुरू स्थित ज्ञानार्जन एवं विकास केंद्र में झारखंड खान समूह एवं ओडिशा खान समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सुरक्षा, उत्पादन वृद्धि, खदान विकास, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, डिजिटल परिवर्तन तथा परिचालन उत्कृष्टता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. पंडा ने वर्ष 2030-31 तक 35 मिलियन टन कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के सेल के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए कंपनी की निजी खदानों से प्रतिवर्ष 100 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे उत्पादन आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ घरेलू बाजार की मांग को भी पूरा किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कच्चे माल की सुरक्षा, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता तथा सेल की दीर्घकालिक विकास यात्रा के लिए मजबूत खनन संचालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सेल के लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि खनन कार्यों में दक्षता, संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग तथा लौह अयस्क उत्पादन में वृद्धि इस उद्देश्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने उत्पादकता, सुरक्षा तथा सतत् खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) सहित डिजिटल प्रौद्योगिकियों के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया।
यह दौरा सुरक्षित, प्रौद्योगिकी-संचालित एवं सतत् खनन संचालन के विकास के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है। यह कंपनी की विस्तार योजनाओं को गति देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के ध्येय को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







