पुणे: सुजलॉन ने अपनी ‘सुजलॉन 2.0’ रणनीति के तहत डेवलपर कंपनी (DevCo) आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाते हुए टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) से 400 मेगावाट की नई पवन ऊर्जा परियोजना के लिए ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) अनुबंध हासिल किया है। टीपीआरईएल, टाटा पावर की सहायक कंपनी और भारत की अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में से एक है। पिछले 12 महीनों के भीतर मिले इस दोहराए गए ऑर्डर के साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में दोनों कंपनियों की कुल साझेदारी क्षमता 1 गीगावाट से अधिक हो गई है।
इस नए ऑर्डर के बाद आंध्र प्रदेश में सुजलॉन की ऑर्डर बुक लगभग 1 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो देश के प्रमुख पवन ऊर्जा बाजारों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश में सुजलॉन की स्थापित क्षमता 1.8 गीगावाट है, जो दक्षिण भारत में कंपनी की कुल स्थापित क्षमता का 28.44 प्रतिशत है।
परियोजना के तहत सुजलॉन अपने प्रमुख एस144 (S144) मॉडल के 127 विंड टर्बाइन जनरेटर (WTG) स्थापित करेगा, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 3.15 मेगावाट होगी। कंपनी भूमि अधिग्रहण, टर्बाइन आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), पूलिंग सब-स्टेशन (PSS), एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) लाइन, कमीशनिंग तथा संचालन एवं रखरखाव सेवाओं सहित संपूर्ण ईपीसी सेवाएं प्रदान करेगी। यह परियोजना आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थापित की जाएगी।
सुजलॉन समूह के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि टाटा पावर भारत के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक का संचालन करती है और चार राज्यों में उसके साथ 1 गीगावाट से अधिक के संचयी ऑर्डर हासिल करना कंपनी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में दोनों कंपनियों की साझेदारी व्यक्तिगत परियोजनाओं से आगे बढ़कर उन्नत हाइब्रिड और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों तक पहुंच चुकी है, जो भारत के ऊर्जा परिवर्तन को समर्थन देते हैं।
सुजलॉन समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय कपूर ने कहा कि परियोजनाओं के सफल और समयबद्ध निष्पादन की बढ़ती मांग के बीच ईपीसी मॉडल नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पसंदीदा विकल्प बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि सुजलॉन की एंड-टू-एंड निष्पादन क्षमता ग्राहकों को परियोजना संबंधी जोखिम कम करने और बड़े पैमाने पर विस्तार करने में मदद करती है। उनके अनुसार, यह एकीकृत डिलीवरी मॉडल भारत में नवीकरणीय ऊर्जा विकास के अगले चरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







