नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने कहा है कि देश में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आगमन में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब कनाडा सरकार विदेशी छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने और आवास तथा सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम उठा रही है।
भारतीय छात्रों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। वर्ष 2023 में कनाडा में अध्ययन करने वाले सभी विदेशी छात्रों में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी 51.6 प्रतिशत थी, जो अब घटकर केवल 8.1 प्रतिशत रह गई है। यह बदलाव कनाडा के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा परिदृश्य में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र वीजा नियमों को सख्त किए जाने, अध्ययन परमिट की संख्या पर सीमा तय करने और स्थायी निवास से जुड़ी नीतियों में बदलाव के कारण विदेशी छात्रों, विशेषकर भारतीय विद्यार्थियों की रुचि में कमी आई है। इसके अलावा, बढ़ती जीवन-यापन लागत और आवास संकट भी छात्रों के निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।
कनाडा लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एक प्रमुख गंतव्य रहा है। हालांकि, हालिया नीतिगत परिवर्तनों के बाद कई छात्र अब अन्य देशों के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में इन बदलावों का असर वैश्विक छात्र गतिशीलता पर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।







