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हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 32 मिलियन टन अयस्क जोड़ा; अन्वेषण सफलता दर 88% के पार बीएचईएल ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के व्यापक रखरखाव हेतु टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के साथ संयुक्त उद्यम समझौता किया Coforge ने हाई-टेक क्षेत्र में AI फीचर्स से एंटरप्राइज परिणामों की ओर बदलाव को तेज किया ACME Solar ने राजस्थान में 66.68 मेगावाट सौर क्षमता और 300 मेगावाट घंटा BESS क्षमता शुरू की Bharat Forge और RTX की प्रैट एंड व्हिटनी कनाडा भारत के स्वदेशी HALE UAV कार्यक्रम के लिए टर्बोप्रॉप इंजन की संभावनाएं तलाशेंगे BHEL को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 2025-26 के अंतर्गत द्वितीय पुरस्कार; लगातार तीसरे वर्ष राजभाषा के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

भारत देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करेगा

भारत देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करेगा
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को नई दिल्ली में इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा जानकारी दी जा रही है

नई दिल्ली: केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की, जिसके तहत पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को खोलने के बाद पिछले पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।

यह समीक्षा इन-स्‍पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।

भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं। बढ़ती वैश्विक रुचि स्थापित अंतरिक्ष यात्री देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के साथ बढ़ते जुड़ाव में भी परिलक्षित होती है।

इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।

कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है। विश्वविद्यालयों में स्थापित होने वाली आगामी अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं से व्यावहारिक और प्रायोगिक शिक्षण के अवसर प्रदान करके इस प्रतिभा भंडार को और मजबूत करने की उम्मीद है।

बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी नेतृत्व वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह, स्टार्टअप्स के लिए साझा उपग्रह बस प्लेटफॉर्म का विकास, और अहमदाबाद स्थित इन-स्‍पेस तकनीकी केंद्र में डिजाइन, एकीकरण और परीक्षण सुविधाओं तक विस्तारित पहुंच जैसी पहलों के माध्यम से नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उद्योग की भागीदारी के साथ लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) सहित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम भी प्रगति कर रहे हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, और अब इसकी साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं।

स्थापना के बाद से, इन-स्‍पेस को स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग से 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, और इसने 129 प्राधिकरण प्रदान किए हैं, जो भारत के सुधारित अंतरिक्ष इको-सिस्‍टम में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

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