Q1 FY2027: प्रमुख वित्तीय उपलब्धियां
- कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम 6% सालाना वृद्धि के साथ 3.1 करोड़ टन (31 मिलियन टन) रहा।
- परिचालन से राजस्व 18% बढ़कर 1,445 करोड़ रुपये पहुंचा।
- परिचालन EBITDA 16% की वृद्धि के साथ 674 करोड़ रुपये रहा।
- कर-पूर्व लाभ (PBT) 463 करोड़ रुपये और कर-पश्चात लाभ (PAT) 358 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
- कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत रही। शुद्ध नकदी (नेट कैश) 2,769 करोड़ रुपये, सकल ऋण (ग्रॉस डेट) 7,094 करोड़ रुपये तथा नकद एवं बैंक शेष 9,863 करोड़ रुपये रहा।
Q1 FY2027: प्रमुख अपडेट
- गोवा स्थित साउथ वेस्ट पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 11 MTPA से बढ़ाकर 12 MTPA तथा मैंगलुरु कंटेनर टर्मिनल की क्षमता 2 MTPA से बढ़ाकर 6 MTPA की गई।
- महाराष्ट्र के मुरबे पोर्ट के लिए पर्यावरण मंजूरी और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से रेल कनेक्टिविटी की स्वीकृति प्राप्त हुई, जो परियोजना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- कोलकाता कंटेनर टर्मिनल पर अंतरिम परिचालन शुरू किया गया। साथ ही, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में लगभग 0.93 मिलियन TEUs क्षमता वाली एक और PPP परियोजना हासिल की गई, जिससे कोलकाता में कुल कंटेनर हैंडलिंग क्षमता बढ़कर 1.4 मिलियन TEUs हो गई।
- अरक्कोनम जीसीटी में वाणिज्यिक परिचालन शुरू कर लॉजिस्टिक्स कारोबार का विस्तार किया गया।
- कंपनी ने 7,503 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे भविष्य के विस्तार के लिए पूंजी जुटाई गई। इसके साथ ही SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित हुआ और वैश्विक व घरेलू निवेशकों को आकर्षित किया गया।
- मूडीज से Baa3 (इन्वेस्टमेंट ग्रेड) रेटिंग स्थिर आउटलुक (Stable Outlook) के साथ प्राप्त हुई, जो मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर तरलता और भविष्य की वृद्धि के लिए वित्तीय लचीलापन को दर्शाती है।
परिचालन एवं समेकित वित्तीय प्रदर्शन
तिमाही के दौरान कंपनी ने 3.1 करोड़ टन कार्गो हैंडल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6% अधिक रहा।यह वृद्धि मुख्य रूप से जैगढ़ पोर्ट में एंकर ग्राहकों से अधिक कार्गो और नए कार्गो सेगमेंट में तीसरे पक्ष के कार्गो की बढ़ती आवाजाही के कारण हुई। इसके अलावा धारमतर पोर्ट, साउथ वेस्ट पोर्ट, एन्नोर बल्क टर्मिनल तथा तूतीकोरिन टर्मिनल के अंतरिम परिचालन का भी सकारात्मक योगदान रहा। हालांकि, मध्य-पूर्व में चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के कारण फुजैराह लिक्विड टर्मिनल में कम वॉल्यूम ने इस वृद्धि को आंशिक रूप से प्रभावित किया।पोर्ट कारोबार से परिचालन राजस्व 11% बढ़कर 1,208 करोड़ रुपये रहा, जो Q1 FY2026 में 1,086 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि कार्गो वॉल्यूम में बढ़ोतरी और बेहतर उत्पाद मिश्रण के कारण दर्ज की गई।नवकार कॉर्प और रेल रेक कारोबार सहित लॉजिस्टिक्स सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। परिचालन राजस्व 138 करोड़ रुपये से बढ़कर 237 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन EBITDA 20 करोड़ रुपये से बढ़कर 73 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो परिचालन दक्षता और बढ़ते रेल रेक बेड़े के योगदान को दर्शाता है।उच्च पोर्ट वॉल्यूम और लॉजिस्टिक्स कारोबार की मजबूत गति के चलते समेकित परिचालन राजस्व 18% बढ़कर 1,445 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन EBITDA 581 करोड़ रुपये से बढ़कर 674 करोड़ रुपये रहा।कर-पूर्व लाभ (PBT) 463 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 473 करोड़ रुपये की तुलना में थोड़ा कम है। इसका मुख्य कारण अन्य आय में कमी रही, क्योंकि अधिशेष धनराशि को जारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) परियोजनाओं में लगाया गया। वहीं, कर-पश्चात लाभ (PAT) 390 करोड़ रुपये से घटकर 358 करोड़ रुपये रहा, जिसका कारण कम PBT और तिमाही के दौरान प्रभावी कर दर में वृद्धि रही।
विकास रणनीति और मार्गदर्शन
कंपनी ने पहले घोषित योजना के अनुसार वित्त वर्ष 2030 या उससे पहले अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता मौजूदा 186 MTPA से बढ़ाकर 400 MTPA करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 30,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) की व्यापक योजना बनाई गई है।इसके अतिरिक्त, लॉजिस्टिक्स कारोबार के विस्तार के लिए 9,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवकार कॉर्प के अधिग्रहण के आधार पर कंपनी पूरे भारत में एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। मजबूत बैलेंस शीट के बल पर कंपनी जैविक (ऑर्गेनिक) और अधिग्रहण आधारित (इनऑर्गेनिक) दोनों तरह की वृद्धि की रणनीति अपनाने की स्थिति में है।कंपनी ने FY2027 के लिए 6,850 करोड़ रुपये के समेकित परिचालन राजस्व और 3,000 करोड़ रुपये के परिचालन EBITDA का लक्ष्य निर्धारित किया है। FY2026 की तुलना में EBITDA में FY2027 में लगभग 15% वृद्धि और FY2028 तक इसके लगभग दोगुना होने की उम्मीद जताई गई है। कंपनी का मानना है कि पोर्ट कारोबार में चल रही विकास परियोजनाओं की स्पष्ट दृश्यता और लॉजिस्टिक्स कारोबार में पूंजीगत निवेश से परिचालन आय में बढ़ते योगदान के चलते यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।







