अहमदाबाद: नवाचार-आधारित वैश्विक लाइफसाइंसेज कंपनी जायडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड (“जायडस”) ने घोषणा की है कि उसे भारत में प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (P. falciparum) से होने वाले जटिलतारहित मलेरिया और प्लास्मोडियम विवैक्स (P. vivax) से होने वाले जटिलतारहित मलेरिया के मरीजों में जिंट्रोडायजीन के दो फेज-III क्लिनिकल परीक्षण संचालित करने की अनुमति मिल गई है।
पहला और दूसरा दोनों फेज-III परीक्षण बहु-केंद्रित, रैंडमाइज्ड, असेसर-ब्लाइंड और एक्टिव-कम्पेरेटर आधारित अध्ययन होंगे। इनका उद्देश्य P. falciparum और P. vivax से होने वाले जटिलतारहित मलेरिया के मरीजों में मौखिक रूप से दी जाने वाली जिंट्रोडायजीन की प्रभावशीलता, सुरक्षा और सहनशीलता का मूल्यांकन करना है।
पहला फेज-III क्लिनिकल परीक्षण P. falciparum से होने वाले जटिलतारहित मलेरिया के 651 मरीजों पर किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य पीसीआर-समायोजित पर्याप्त नैदानिक और परजीवी प्रतिक्रिया (ACPR) के आधार पर जिंट्रोडायजीन की प्रभावशीलता का आकलन करना है। दूसरा फेज-III क्लिनिकल परीक्षण 390 मरीजों पर किया जाएगा, जिसमें P. vivax मोनो-इन्फेक्शन से होने वाले जटिलतारहित मलेरिया के मरीजों में ACPR के आधार पर जिंट्रोडायजीन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा।
दोनों क्लिनिकल परीक्षणों में द्वितीयक मानकों में पुनरुत्थान (रिक्रूडेसेंस) की घटनाएं शामिल होंगी—अर्थात मलेरिया के लक्षणों और रक्त में परजीवियों की वापसी, क्योंकि मूल संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। इसके अलावा नए संक्रमण, परजीवी समाप्ति समय और बुखार समाप्ति समय का भी आकलन किया जाएगा।
इस प्रगति पर बोलते हुए जायडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. शर्विल पटेल ने कहा, “नवाचार की हमारी यात्रा हमेशा विज्ञान को आगे बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवा की अपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए रही है। मलेरिया आज भी सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। जिंट्रोडायजीन के फेज-III परीक्षण शुरू करने की मंजूरी मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मौजूदा उपचारों के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को देखते हुए हम इस चुनौती से निपटने के लिए एक प्रभावी उपचार विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
पिछले वर्ष ही भारत में 1,80,000 से अधिक लोगों में मलेरिया का निदान हुआ था। वर्ष 2016 में मेडिसिन्स फॉर मलेरिया वेंचर (MMV) और जायडस ने जिंट्रोडायजीन युक्त दवा संयोजन विकसित करने के लिए सहयोग की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य मौजूदा आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन उपचार (ACTs) का प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराना था, जो अब प्रतिरोध के खतरे का सामना कर रहे हैं।
आर्टेमिसिनिन प्रतिरोध को मलेरिया के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ‘वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, क्लोरोक्विन और सल्फाडॉक्सिन-पाइरीमेथामीन के बाद मलेरिया उपचार की मुख्य आधारशिला माने जाने वाले आर्टेमिसिनिन डेरिवेटिव्स के प्रति आंशिक प्रतिरोध अब अफ्रीका के कम से कम 8 देशों में पुष्टि या संदिग्ध रूप में सामने आ चुका है।
जिंट्रोडायजीन को संयोजन उपचार के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि P. falciparum और P. vivax मलेरिया के उपचार के लिए मौजूदा प्रथम-पंक्ति एंटीमलेरियल दवाओं का एक प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।







