New Delhi: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) द्वारा आयोजित 40वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ‘अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम’ का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार के मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी नेतृत्व में तथा समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र कुमार मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शैक्षणिक स्वायत्तता और विद्यार्थियों को विकल्प विषय पर अपने विचार रखते हुए भारत की शिक्षा व्यवस्था के ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने औपनिवेशिक काल में मैकॉले के मिनट (1835) तथा वुड्स डिस्पैच (1854) का उल्लेख करते हुए बताया कि इन व्यवस्थाओं ने भारत में केंद्रीकृत एवं परीक्षा-केंद्रित शिक्षा प्रणाली के विकास को प्रभावित किया।

प्रो. नागेंद्र कुमार ने स्वतंत्रता के बाद शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों के संदर्भ में राधाकृष्णन आयोग एवं मुदलियार आयोग के योगदान तथा शैक्षणिक स्वायत्तता के क्रमिक विकास को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है, जिसमें बहुविषयक शिक्षा, विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता, क्रेडिट हस्तांतरण एवं गतिशीलता तथा संस्थागत स्वायत्तता पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने इन प्रावधानों को अधिक लचीली, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित उच्च शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए हकेवि यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक एवं शिक्षक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार ने कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार, समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा, मुख्य अतिथि प्रो. नागेंद्र कुमार, प्रो. तनु गुप्ता, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. पायल कंवर चंदेल एवं डॉ. विष्णु नारायण कुचेरिया, सभी विषय विशेषज्ञों, प्रतिभागियों तथा यूजीसी-एमएमटीटीसी के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।







