कोलकाता: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने जुलाई वित्त वर्ष 2026-27 में कोयला उत्पादन में 8.44% की वृद्धि दर्ज करते हुए इसे 50.36 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंचाया। वहीं, कोयले की आपूर्ति 18.38% बढ़कर 64.19 एमटी रही। जुलाई वित्त वर्ष 2026-27 में की गई यह आपूर्ति किसी भी वित्त वर्ष के जुलाई महीने में अब तक की सर्वाधिक मासिक कोयला आपूर्ति है। इससे पहले जुलाई महीने में सर्वाधिक 60.5 एमटी कोयले की आपूर्ति वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज की गई थी।
जून वित्त वर्ष 2026-27 में भी सीआईएल ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 65.95 एमटी कोयले की आपूर्ति की थी, जो जून महीने में अब तक की सर्वाधिक आपूर्ति रही। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) के दौरान कंपनी की संचयी कोयला आपूर्ति 6.9% बढ़कर 262.04 एमटी हो गई, जो इस अवधि के लिए अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इससे पहले अप्रैल-जुलाई वित्त वर्ष 2024-25 में 259.4 एमटी की आपूर्ति का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
कंपनी ने कहा कि बारिश से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद उसने कोयला उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज की है। साथ ही, मांग के अनुरूप इन्वेंट्री अनुकूलन रणनीति के माध्यम से कोयले की आपूर्ति की मजबूत गति बनाए रखते हुए उत्पादन और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखा है।
कंपनी के सबसे बड़े उपभोक्ता वर्ग बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति भी 18% बढ़कर जुलाई वित्त वर्ष 2026-27 में 49.77 एमटी रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 42.35 एमटी थी। वहीं, गैर-विनियमित (नॉन-रेगुलेटेड) क्षेत्र को आपूर्ति 21% बढ़कर 11.89 एमटी से 14.42 एमटी हो गई।
सीआईएल ने ओवरबर्डन (ओबी) हटाने के कार्य में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया, जो सतत कोयला उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण खनन गतिविधि है। जुलाई वित्त वर्ष 2026-27 में ओवरबर्डन हटाने का कार्य 21.11% बढ़कर 99.36 मिलियन घन मीटर (एमसीयूएम) से 120.35 एमसीयूएम हो गया। संचयी आधार पर अप्रैल-जुलाई वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ओवरबर्डन हटाने का कार्य 625.02 एमसीयूएम रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2.85% अधिक है।
ओवरबर्डन हटाना खुली खदान (ओपनकास्ट) कोयला खनन की एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक प्रक्रिया है। इसके तहत कोयला परत के ऊपर मौजूद मिट्टी, चट्टानों और अन्य पदार्थों को हटाकर कोयला भंडार तक पहुंच बनाई जाती है। समय पर और पर्याप्त मात्रा में ओवरबर्डन हटाने से कोयला परतों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होती है, जिससे सतत उत्पादन संभव हो पाता है।







