गुरुग्राम: भारत की अग्रणी इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना प्रदाता कंपनियों में से एक एम्पवोल्ट्स लिमिटेड, चोलामंडलम लीजिंग लिमिटेड के साथ साझेदारी में पश्चिमी भारत के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में 17 उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक चार्जिंग हब विकसित और संचालित करेगी।
यह अवसंरचना मॉन्ट्रा इलेक्ट्रिक RHINO 5538 ईवी ट्रकों की तैनाती को समर्थन देगी, जिससे भारी-भरकम इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विश्वसनीय चार्जिंग की महत्वपूर्ण चुनौती को दूर करते हुए लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक माल ढुलाई को बड़े पैमाने पर संभव बनाया जा सकेगा।
मॉन्ट्रा इलेक्ट्रिक (टीआई क्लीन मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड) के प्रबंध निदेशक जलज गुप्ता ने कहा, “यह देश का पहला लंबी दूरी का ग्रीन फ्रेट कॉरिडोर है, जिसे हम संचालित करने जा रहे हैं, और हमें एम्पवोल्ट्स लिमिटेड के साथ अपने सहयोग को और मजबूत करने की खुशी है।”
17 चार्जिंग हब का यह नेटवर्क, 18 महीनों से अधिक के परिचालन अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है। इसे लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के बीच मल्टी-फ्लीट संचालन को समर्थन देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे प्रमुख माल ढुलाई मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में तेल पर निर्भरता कम कर ‘आत्मनिर्भर’ भारत की दिशा में अवसंरचना क्षेत्र की कंपनियों को सक्षम बनाएगी।
फ्लीट ऑपरेटरों के लिए इसका अर्थ है लंबी दूरी के लिए विश्वसनीय चार्जिंग, कम रेंज एंग्जायटी और बेहतर अपटाइम, जिसका सीधा असर उनकी आय क्षमता पर पड़ेगा। कॉरपोरेट कंपनियों के लिए यह स्कोप-3 उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को हासिल करने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करेगा, जिससे इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स केवल प्रयोगात्मक न रहकर बड़े पैमाने पर अपनाने योग्य बन सकेगी। उद्योग स्तर पर यह पहल एक महत्वपूर्ण अवसंरचना बाधा को दूर कर इलेक्ट्रिक ट्रकिंग की ओर संक्रमण को तेज करेगी।
एम्पवोल्ट्स लिमिटेड के निदेशक नैमिष रावल ने कहा, “हमें अपने सहयोग को और मजबूत करने पर गर्व है और हम परिवहनकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों तथा ट्रक निर्माताओं के साथ मिलकर ‘ईवी चार्जिंग को आसान’ बनाने के लिए अपने प्रयास जारी रखने को लेकर प्रसन्न हैं।”
एम्पवोल्ट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विपुल चौहान ने कहा, “ईवी अवसंरचना में अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ हमें विश्वास है कि हम TICMPL-CLL को ग्रीन मोबिलिटी के बड़े लक्ष्यों में सहयोग देने में पूरी तरह सक्षम हैं। एम्पवोल्ट्स ने रिकॉर्ड समय में इन 17 चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की योजना बनाई है, जो विद्युतीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने में राष्ट्रीय मानक स्थापित कर सकती है। इससे देश की जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा आवश्यकता कम होगी। यह बाजार की अपेक्षाओं और दीर्घकालिक टिकाऊ तथा लाभदायक परिचालन के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगा।”
इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 6.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। ऐसे समय में जब भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रकों के वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 55 प्रतिशत सीएजीआर (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) से बढ़ने का अनुमान है, यह भारत की ग्रीन फ्रेट क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत का वाणिज्यिक ईवी बाजार एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रकों के वित्त वर्ष 2030 तक 55 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि व्यापक वाणिज्यिक वाहन ईवी बाजार 2033 तक 38.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। पीएम ई-ड्राइव (10,900 करोड़ रुपये का आवंटन), फेम-II चार्जिंग अवसंरचना फंडिंग और 500 करोड़ रुपये की ई-ट्रक सब्सिडी जैसी सरकारी नीतियों ने बाजार को अभूतपूर्व गति दी है।
फिर भी, चार्जिंग अवसंरचना की कमी, परिचालन अनिश्चितता और एकीकरण की जटिलता जैसी चुनौतियां अब तक इलेक्ट्रिक फ्लीट अपनाने में बाधा बनी हुई थीं। TICMPL-CLL की यह पहल, एम्पवोल्ट्स के साथ मिलकर, इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। चार पूरी तरह चालू ई-ट्रक हब, फ्लीट संचालन प्रबंधन और मल्टी-एलएसपी क्षमता से समर्थित सिद्ध चार्जिंग अवसंरचना के साथ एम्पवोल्ट्स को विश्वास है कि वह परिचालन लागत को अनुकूलित करते हुए ESG लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम होगी।







