गुजरात में कंपनी 16.83 मेगावाट का हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रही है, जिसमें 6.93 मेगावाट पीक (MWp) सौर और 9.90 मेगावाट पवन क्षमता शामिल है। समूह-कैप्टिव मॉडल के तहत विकसित यह परियोजना हजीरा स्थित शेल के एलएनजी टर्मिनल को बिजली उपलब्ध कराएगी। हाइब्रिड कॉन्फ़िगरेशन को एलएनजी टर्मिनल के ऊर्जा-गहन संचालन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे आपूर्ति की स्थिरता और परिचालन क्षमता में सुधार होगा।
कर्नाटक में कंपनी 13.2 मेगावाट का एक और हाइब्रिड संयंत्र विकसित कर रही है, जिसमें जगलूर में 9.9 मेगावाट पीक (MWp) सौर और होनावाड में 3.3 मेगावाट पवन क्षमता शामिल है। यहां उत्पादित बिजली बेंगलुरु स्थित शेल टेक्नोलॉजी सेंटर को आपूर्ति की जाएगी, जो शेल का तीसरा वैश्विक टेक्नोलॉजी केंद्र है। यह केंद्र उन्नत इंजीनियरिंग, डिजिटल और पायलट परीक्षण सुविधाओं से लैस एक आधुनिक नवाचार हब है।
समूह-कैप्टिव ढांचे के तहत दोनों कंपनियां इन परियोजनाओं में संयुक्त रूप से निवेश करेंगी। यह पहल भारत में कम-कार्बन संचालन को बढ़ावा देने के शेल के प्रयासों के अनुरूप है।
क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कुलदीप जैन ने कहा कि कंपनी शेल के साथ मिलकर गुजरात और कर्नाटक में उसके संचालन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उसके नेट-जीरो लक्ष्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि इससे प्रमुख बाजारों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और कॉर्पोरेट नेतृत्व में स्थिरता को मुख्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता भारत की कुल बिजली मांग का लगभग आधा हिस्सा हैं, ऐसे में ऊर्जा संक्रमण में उनकी भूमिका अहम है। दीर्घकालिक और अनुकूलित नवीकरणीय समाधान व्यवसायों को कार्बन उत्सर्जन घटाने के साथ-साथ विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।
वहीं, मानसी मदान त्रिपाठी, अध्यक्षा, शेल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ इंडिया और वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शेल ल्यूब्रिकेंट्स, एशिया पैसिफिक, ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच हाइब्रिड नवीकरणीय समाधान विश्वसनीयता और डीकार्बोनाइजेशन के बीच संतुलन बनाने का व्यावहारिक विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि क्लीनमैक्स के साथ यह सहयोग शेल के भारत में संचालन को डीकार्बोनाइज करने और ऊर्जा संक्रमण में भागीदार बनने के प्रयासों को मजबूत करेगा।
इन परियोजनाओं से सालाना करीब 66,832 मेगावाट-घंटे (MWh) नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन होने की उम्मीद है, जो पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) के आधार पर होगा।







