उदयपुर: दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 चांदी उत्पादकों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (बीएसई: 500188, एनएसई: HINDZINC) ने राजस्थान में 250 हेक्टेयर की पारिस्थितिक बहाली परियोजना विकसित करने के लिए द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना औद्योगिक परिसरों के भीतर दुनिया के सबसे बड़े हरित आवरण क्षेत्र के रूप में विकसित होने जा रही है। चित्तौड़गढ़ जिले स्थित हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स में शुरू की जाने वाली यह पहल औद्योगिक परिदृश्यों को समृद्ध प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों में परिवर्तित करने की दिशा में कंपनी का एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह सहयोग जैव विविधता हानि को रोकने और उसे पलटने के लिए हिंदुस्तान जिंक के ‘सस्टेनेबिलिटी गोल 2030’ को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके तहत मापनीय सुधारों के माध्यम से ‘नेट पॉजिटिव इम्पैक्ट’ (एनपीआई) हासिल करने और दीर्घकाल में प्रकृति-सकारात्मक परिणामों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
परियोजना के तहत स्थानीय परिदृश्य के अनुरूप देशज वृक्षों, झाड़ियों, औषधीय पौधों और घासों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक और बहु-स्तरीय पारिस्थितिक बहाली दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसमें आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन, जलाशयों और जलीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण तथा दीर्घकालिक रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करने जैसे उपाय भी शामिल होंगे। टेरी उपयुक्त देशज और अनुकूलित पौधों की प्रजातियों की पहचान करने के साथ-साथ योजना, डिजाइन और क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में विषय विशेषज्ञों का सहयोग भी उपलब्ध कराएगा।
यह नया सहयोग चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स में हिंदुस्तान जिंक और टेरी के लंबे समय से चले आ रहे साझेदारी संबंधों को आगे बढ़ाता है। जारोफिक्स यार्ड (जहां जिंक स्मेल्टिंग प्रक्रिया से उत्पन्न अवशेषों का सुरक्षित भंडारण और प्रबंधन किया जाता है) में 22.25 हेक्टेयर क्षेत्र में दो चरणों में बहाली गतिविधियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं, जिससे क्षतिग्रस्त औद्योगिक भूमि को पारिस्थितिक रूप से कार्यशील और जैव विविधता युक्त हरित क्षेत्र में बदला गया है। इसके साथ ही कॉम्प्लेक्स के भीतर सुरक्षित लैंडफिल के ऊपर 6 हेक्टेयर का जैव विविधता पार्क भी विकसित किया जा रहा है। टेरी की माइकोराइजा तकनीक के उपयोग से लगभग 56,400 देशज वृक्ष लगाए गए हैं, जिससे चुनौतीपूर्ण औद्योगिक परिस्थितियों में भी घना हरित आवरण तैयार हुआ है।
इस विकास पर टिप्पणी करते हुए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण मिश्रा ने कहा, “हिंदुस्तान जिंक में स्थिरता हमारी कार्यप्रणाली का प्रमुख आधार है। जल प्रबंधन, परिपत्र अर्थव्यवस्था, डीकार्बोनाइजेशन और जैव विविधता संरक्षण से लेकर हमारा ध्यान जिम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार संचालन विकसित करने पर है। टेरी के साथ हमारी साझेदारी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके माध्यम से औद्योगिक भूमि को ऐसे सुदृढ़ हरित पारिस्थितिक तंत्रों में बदला जा रहा है जो देशज जैव विविधता और पारिस्थितिक बहाली को समर्थन देते हैं। आईसीएमएम से जुड़ने वाली पहली भारतीय कंपनी के रूप में हम सतत खनन के वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य करना जारी रखे हुए हैं और पर्यावरण, समुदायों तथा राष्ट्र के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं।”
यह पहल हिंदुस्तान जिंक के व्यापक पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) रोडमैप के अनुरूप है, जिसमें भूमि बहाली, जैव विविधता संरक्षण, जल प्रबंधन, डीकार्बोनाइजेशन और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है। कंपनी अपने 530 मेगावाट के चौबीसों घंटे उपलब्ध नवीकरणीय ऊर्जा समझौते के माध्यम से स्थिरता प्रदर्शन को मजबूत कर रही है, जिससे उसकी कुल बिजली आवश्यकता का 70 प्रतिशत से अधिक पूरा होने की उम्मीद है और इसकी प्रारंभिक आपूर्ति शुरू हो चुकी है। कंपनी ने जल पुनर्चक्रण दर को बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया है तथा इलेक्ट्रिक और एलएनजी चालित वाहनों सहित अपने हरित परिवहन बेड़े का विस्तार कर 232 वाहनों तक पहुंचा दिया है।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक को हाल ही में एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में लगातार तीसरे वर्ष दुनिया की सबसे सतत धातु एवं खनन कंपनी का दर्जा दिया गया है। प्रस्तावित 250 हेक्टेयर पारिस्थितिक बहाली परियोजना के साथ कंपनी यह प्रदर्शित करना जारी रखे हुए है कि जिम्मेदार औद्योगिक संचालन किस प्रकार पुनर्जीवित परिदृश्यों, जलवायु अनुकूलन क्षमता तथा समुदायों, जैव विविधता और पृथ्वी के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन में योगदान दे सकता है।







