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जिंदल स्टेनलेस ने भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन के लिए स्टेनलेस स्टील की आपूर्ति की, स्वच्छ और भविष्य-उन्मुख परिवहन को दिया बढ़ावा आरईसी लिमिटेड पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में 20 स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से 1,500 से अधिक छात्रों को लाभान्वित करेगी एसजेवीएन की अध्यक्षता में नराकास, शिमला (कार्यालय-2) की छमाही बैठक ब्रिटिश स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूशन ने जोखिम प्रबंधन के लिए आरईसी की ISO 31000:2018 मान्यता का नवीनीकरण किया GRE Renew Enertech ने 100 मेगावाट पीक सौर पोर्टफोलियो की जानकारी दी, EPC ऑर्डर बुक 224 करोड़ रुपये पर पहुंची रिलायंस इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर ने Q1 FY27 के वित्तीय नतीजे घोषित किए

जिंदल स्टेनलेस ने भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन के लिए स्टेनलेस स्टील की आपूर्ति की, स्वच्छ और भविष्य-उन्मुख परिवहन को दिया बढ़ावा

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New Delhi: भारत में मजबूत, स्वच्छ और भविष्य-उन्मुख परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए देश की अग्रणी स्टेनलेस स्टील निर्माता कंपनी जिंदल स्टेनलेस ने हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली ट्रेन के लिए कुल स्टेनलेस स्टील का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया है। जिंदल स्टेनलेस के जाजपुर और हिसार संयंत्रों से विशेष रूप से आपूर्ति किए गए प्रीमियम ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील ग्रेड X5CrNi1810 का इस्तेमाल इस हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण में किया गया है। हाइड्रोजन प्रणोदन प्रणाली से लैस यह ट्रेन पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधन अपनाने की भारतीय रेलवे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जंग से बचाव, अधिक सुरक्षा, ज्यादा मजबूती, कम वजन, आग और टक्कर का बेहतर सामना करने की क्षमता, दीर्घकालिक इस्तेमाल और पुनर्चक्रण की सुविधा जैसे गुणों के कारण आधुनिक रेल डिब्बों के लिए स्टेनलेस स्टील सबसे पसंदीदा सामग्री बन गया है। इसके हल्के वजन से ऊर्जा दक्षता भी बढ़ती है, जिससे यह हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों जैसे नए परिवहन साधनों के लिए खास तौर पर उपयुक्त है।

इस उपलब्धि पर जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक श्री अभ्युदय जिंदल ने कहा, भविष्य में परिवहन सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि ऐसी बेहतर सामग्रियों पर भी निर्भर करेगा जो इन चीजों को ज्यादा प्रभावी, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाएं। भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है। यह देश की स्वच्छ परिवहन व्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। स्टेनलेस स्टील ने रेलवे में अपनी मजबूती, जंग न लगने की क्षमता, सुरक्षा और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन के कारण अपनी उपयोगिता बार-बार साबित की है। भारत जैसे-जैसे नई पीढ़ी के परिवहन ढांचे का तेजी से विकास कर रहा है, हम ऐसे स्टेनलेस स्टील समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो नवाचार को बढ़ावा दें, टिकाऊ हों और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करें।”

जिंदल स्टेनलेस पिछले तीन दशकों से भारतीय रेलवे को स्टेनलेस स्टील की आपूर्ति कर रही है। कंपनी ने पहले एलएचबी कोच, वंदे भारत स्लीपर, भारत की पहली वंदे मेट्रो ट्रेन सहित कई मेट्रो और इंटरसिटी ट्रेनों जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए स्टेनलेस स्टील उपलब्ध कराया है। कंपनी मालगाड़ी के डिब्बों के लिए भी नियमित रूप से सामग्री की आपूर्ति करती है। इसमें माल परिवहन के लिए देश के पहले जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील नमक कंटेनर भी शामिल हैं। रेलवे से जुड़ी उन्नत परियोजनाओं में कंपनी का बढ़ता योगदान इस बात को दर्शाता है कि सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले परिवहन ढांचे के लिए स्टेनलेस स्टील को तेजी से सबसे उपयुक्त सामग्री के रूप में अपनाया जा रहा है।

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