नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें महर्षि वाल्मीकि की करुणा का उल्लेख किया गया है। इसी करुणा से प्रथम श्लोक की रचना हुई और रामायण की नींव पड़ी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा:
“आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए बताया कि जब महर्षि वाल्मीकि कुश और यज्ञ के लिए लकड़ियां एकत्र करने जा रहे थे, तब उन्होंने क्रौंच पक्षी के करुण विलाप को सुना। उनके निर्मल हृदय में जागी करुणा श्लोक के रूप में प्रकट हुई। यही श्लोक रामायण का आधार बना, जो सर्वज्ञ महर्षि वाल्मीकि की करुणा, समभाव, तपस्या और ज्ञान को दर्शाता है।







