New Delhi: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के राजभाषा अनुभाग द्वारा ‘आधुनिक तकनीकों तथा टूल्स के सही प्रयोग‘ विषय पर एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवीनतम डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरणों तथा विभिन्न कार्यालयी टूल्स के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके। कार्यशाला में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल के जनसंपर्क अधिकारी एवं राजभाषा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. राजेश चौहान मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान युग तकनीक और नवाचार का युग है, जहां प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी में कार्य निष्पादन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी तकनीक-संचालित शिक्षा और प्रशासन पर विशेष बल देती है।

कार्यशाला की शुरुआत दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। तत्पश्चात विश्वविद्यालय में हिंदी अधिकारी बी.पी. सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि राजभाषा अनुभाग का निरंतर प्रयास है कि विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से भी परिचित कराया जाए। उन्होंने कहा कि भाषा और तकनीक का समन्वय प्रशासनिक दक्षता को नई दिशा प्रदान कर सकता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उन्नत तकनीकी उपकरणों ने कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन किया है। ऐसे समय में इन तकनीकों का सही और जिम्मेदार उपयोग सीखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है और इससे राजभाषा के प्रयोग को नई गति मिल रही है। इस प्रकार की कार्यशालाएं कर्मचारियों को समयानुकूल कौशल प्रदान करने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकी संसाधनों से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसी कार्यशालाएं न केवल कार्यकुशलता और उत्पादकता में वृद्धि करती हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. राजेश चौहान ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों एवं डिजिटल टूल्स के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुप्रयोगों, हिंदी लेखन एवं अनुवाद उपकरणों, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कार्यालयी कार्यों में प्रयुक्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा उत्पादकता बढ़ाने वाले विभिन्न सॉफ्टवेयरों के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. चौहान ने कहा कि तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कार्यों की गुणवत्ता और दक्षता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स, हिंदी टंकण सॉफ्टवेयर, अनुवाद प्रणालियों तथा डिजिटल संचार माध्यमों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया। उन्होंने बताया कि इन संसाधनों के माध्यम से कम समय में अधिक गुणवत्तापूर्ण कार्य किया जा सकता है तथा कार्यालयी प्रक्रियाओं को सरल एवं प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने भारत सरकार की नवाचारी पहल डीजीलॉकर, अनुवादिनी, भाषिणी का प्रयोग कर लाभ उठाने के लिए प्रतिभागियों को प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग सदैव विवेकपूर्ण, नैतिक और उत्तरदायित्वपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. नीरज कर्ण सिंह ने कहा कि भारतीय वेद पुराण में ही एआई के उदाहरण व्याप्त हैं और ये केवल भारत में ही मिल सकते हैं। वहीं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सैद्धांतिक उपयोग को हमे अपने कार्यव्यवहार में लाना चाहिए, जो मानव हितकारी हैं और राष्ट्र के विकास में सर्वोपरि हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संकायों तथा प्रशासनिक इकाइयों से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों व नराकास महेंद्रगढ़ के सदस्य कार्यालयों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में हिंदी अधिकारी बी.पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।







