Mumbai: रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) से जुड़े निगरानी ढांचे की समीक्षा की मांग करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को औपचारिक प्रस्तुतीकरण सौंपा है।
कंपनी ने अतिरिक्त निगरानी उपाय (ASM) ढांचे और उसके शेयरों पर लागू ट्रेडिंग प्रतिबंधों की समीक्षा की मांग की है। कंपनी का कहना है कि इन प्रतिबंधों का प्रतिकूल प्रभाव उसके 7 लाख से अधिक सार्वजनिक शेयरधारकों पर पड़ रहा है और बाजार में निष्पक्ष मूल्य निर्धारण (प्राइस डिस्कवरी) तथा निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए इनकी समीक्षा आवश्यक है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अपने प्रस्तुतीकरण में कहा है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत उसके शेयरों में केवल सप्ताह में एक बार और ±5 प्रतिशत के सीमित प्राइस बैंड के भीतर कारोबार की अनुमति है। कंपनी के अनुसार इससे शेयर मूल्य में होने वाला उतार-चढ़ाव काफी हद तक यांत्रिक और पूर्वानुमेय बन जाता है, जो कंपनी की वास्तविक कारोबारी स्थिति, परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक मूल्य सृजन क्षमता को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करता।
कंपनी ने बताया कि उसके शेयर सामान्य परिस्थितियों में बाजार में सक्रिय रूप से और व्यापक स्तर पर कारोबार किए जाते हैं, जो निवेशकों की निरंतर भागीदारी और पर्याप्त तरलता को दर्शाता है। कंपनी का मानना है कि वर्तमान कृत्रिम ट्रेडिंग प्रतिबंध 7 लाख खुदरा और छोटे निवेशकों के हितों के प्रतिकूल हैं तथा बाजार की कुशल कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने यह भी कहा कि इन प्रतिबंधों का सबसे अधिक असर सार्वजनिक शेयरधारकों पर पड़ता है। लोअर सर्किट की स्थिति में निवेशक अक्सर उचित बाजार मूल्य पर अपने निवेश से बाहर नहीं निकल पाते, जबकि उनके निवेश का मूल्य लगभग निश्चित प्रतिशत से हर सप्ताह घटता जाता है।
संतुलित नियामकीय सुरक्षा उपायों की मांग
कंपनी ने कहा कि सप्ताह में एक बार ट्रेडिंग की व्यवस्था प्रभावी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को बाधित करती है और अनजाने में शेयरधारकों के मूल्य में गिरावट का कारण बन सकती है। इसलिए उसने नियामकों से अपने शेयरों पर लागू इस व्यवस्था की समीक्षा करने और निवेशक संरक्षण तथा शेयरधारकों के हितों के साथ बाजार निगरानी उद्देश्यों का संतुलन बनाने वाले उपयुक्त सुरक्षा उपाय लागू करने का आग्रह किया है।
अपने सुझावों में कंपनी ने जोखिम नियंत्रण के प्रमुख उपायों जैसे ग्रॉस सेटलमेंट, 100 प्रतिशत मार्जिन आवश्यकता, अतिरिक्त निगरानी जमा (ASD) और प्राइस-बैंड सुरक्षा को बनाए रखते हुए अधिक प्रभावी मूल्य निर्धारण की अनुमति देने वाला संतुलित ढांचा प्रस्तावित किया है। कंपनी ने नियामकों से समय-समय पर कॉल-ऑक्शन प्रणाली या अधिक व्यापक एवं चरणबद्ध प्राइस बैंड जैसे विकल्पों पर विचार करने का अनुरोध किया है, जिससे वास्तविक दो-तरफा ट्रेडिंग को बढ़ावा मिल सके।
NCLAT के स्थगन आदेश का उल्लेख
कंपनी ने अपने प्रस्तुतीकरण में यह भी रेखांकित किया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) द्वारा कंपनी के खिलाफ दिवाला स्वीकृति आदेश और कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) दोनों पर रोक लगाए जाने के बावजूद ASM ढांचा लागू किया गया। कंपनी ने कहा कि किसी भी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने कंपनी का नियंत्रण नहीं संभाला है और उसके कार्यों का संचालन अब भी विधिवत गठित निदेशक मंडल द्वारा सामान्य रूप से किया जा रहा है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि वह सभी हितधारकों के हित में नियामकों और बाजार संस्थानों के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखेगी तथा अपने शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर केंद्रित रहेगी।







