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दिल्ली में माल ढुलाई से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए A-PAG, IIT दिल्ली और TERI ने सुझाईं व्यावहारिक रणनीतियां टाटा मोटर्स और कैस्ट्रोल इंडिया ने लुब्रिकेंट वैल्यू चेन में प्रयुक्त तेल की सर्कुलैरिटी को बढ़ावा देने के लिए किया सहयोग चैटरबॉक्स ने H2 और वित्त वर्ष 2026 के नतीजे जारी किए; भारत की क्रिएटर इकोनॉमी में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत किया Omaxe ने 6,200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ समर्पित हॉस्पिटैलिटी वर्टिकल की घोषणा की Optiemus Electronics ने भारत में उन्नत वायरलेस संचार मॉड्यूल के निर्माण के लिए क्वेक्टेल के साथ रणनीतिक विनिर्माण साझेदारी शुरू की ब्लू क्लाउड सॉफ्टटेक को कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क प्रदाता के रूप में बीएसएनएल की मान्यता मिली

दिल्ली में माल ढुलाई से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए A-PAG, IIT दिल्ली और TERI ने सुझाईं व्यावहारिक रणनीतियां

A-PAG, IIT Delhi, and TERI Release Landmark Report on Interstate Truck Emissions and Mitigation Strategies in Delhi

नई दिल्ली: एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT दिल्ली) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के सहयोग से ‘टुवर्ड्स क्लीनर फ्रेट इन दिल्ली: असेसिंग इंटरस्टेट ट्रक एमिशंस एंड मिटिगेशन स्ट्रेटेजीज’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में दिल्ली में अंतरराज्यीय भारी मालवाहक वाहनों (HDV) की गतिविधियों, वास्तविक उत्सर्जन और माल ढुलाई से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए व्यावहारिक उपायों का व्यापक आकलन प्रस्तुत किया गया है।

अध्ययन में आधिकारिक टोल डेटा, जमीनी स्तर पर यातायात गणना, चालक सर्वेक्षण और वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन परीक्षण को शामिल किया गया। इसके लिए IIT दिल्ली द्वारा विकसित वर्सेटाइल सोर्स सैंपलिंग सिस्टम (VS3) का उपयोग किया गया, जिससे अंतरराज्यीय ट्रकों की आवाजाही और उनके प्रदूषण प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण तैयार किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण एक गंभीर और लगातार बनी रहने वाली चुनौती है। परिवहन क्षेत्र शहर में PM2.5 सांद्रता का लगभग 18-24 प्रतिशत योगदान देता है। इसमें भारी ट्रकों का उत्सर्जन विशेष रूप से अधिक है, जिसका कारण डीजल ईंधन का उपयोग, पुराने वाहन बेड़े और उच्च परिचालन तीव्रता है।

A-PAG की स्ट्रेटेजी प्रमुख कृतिका चौधरी ने कहा कि पहली बार दिल्ली में अंतरराज्यीय ट्रकों की आवाजाही का विस्तृत और प्रमाणित चित्र सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कौन-से मार्ग, टोल प्लाजा और समयावधियां सबसे अधिक उत्सर्जन में योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट केवल समस्या की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावी हस्तक्षेपों और उनके संभावित परिणामों को भी रेखांकित करती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रतिदिन लगभग 16,900 भारी मालवाहक वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं। ये वाहन कुल दैनिक परिवहन उत्सर्जन का 23 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि सुबह तड़के और रात के समय उनका योगदान बढ़कर 61 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। अध्ययन में कुंडली, रजोकरी, बदरपुर और टिकरी टोल प्लाजा को ऐसे प्रमुख प्रवेश बिंदुओं के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनके माध्यम से शहर में आने वाले 50 प्रतिशत से अधिक ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होती है।

IIT दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन (TRIP) सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल गोयल ने कहा कि यह अध्ययन वास्तविक सड़क उत्सर्जन आंकड़ों, RFID टोल रिकॉर्ड और बड़े पैमाने पर चालक सर्वेक्षणों को जोड़कर तैयार की गई एक बॉटम-अप उत्सर्जन सूची पर आधारित है। इससे ट्रकों के वास्तविक उत्सर्जन की तस्वीर सामने आती है, न कि केवल परीक्षण परिस्थितियों की।

उत्सर्जन मापन के लिए VS3 प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया। अध्ययन का नेतृत्व करने वाली डॉ. गजाला हबीब ने बताया कि इस प्रणाली को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में भारी ट्रकों पर लगाया गया, जिससे गैसीय प्रदूषकों, ब्लैक कार्बन, विभिन्न आकार के कणों और एरोसोल गुणों का एक साथ मापन संभव हुआ। 45 ऑन-रोड प्रयोगों के माध्यम से भारत में भारी ट्रकों के वास्तविक उत्सर्जन से जुड़े सबसे व्यापक डेटासेट में से एक तैयार किया गया।

रिपोर्ट में सात ठोस शमन रणनीतियां सुझाई गई हैं, जिनके लिए समयसीमा और संभावित प्रभाव भी निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, 2027 तक प्री-BS-VI ट्रकों पर प्रतिबंध लगाने से अंतरराज्यीय ट्रकों से होने वाले PM2.5 उत्सर्जन में 51 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। अन्य सुझाए गए उपायों में खाली वापसी यात्राओं का अनुकूलन और इलेक्ट्रिक ट्रकों की ओर संक्रमण शामिल हैं।

TERI की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अंजू गोयल ने कहा कि माल ढुलाई शहरों की सीमाओं तक सीमित नहीं होती और दिल्ली में प्रवेश करने वाले अधिकांश ट्रक एनसीआर राज्यों से आते हैं तथा वहीं लौटते हैं। ऐसे में इस समस्या का समाधान केवल दिल्ली के स्तर पर संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में सुझाई गई रणनीतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरे एनसीआर में समन्वित प्रयास और डेटा-आधारित साझा रोडमैप की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि दिल्ली में माल ढुलाई से होने वाले उत्सर्जन को केवल शहर-स्तरीय या बिखरे हुए प्रयासों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। समन्वित, डेटा-संचालित नीतिगत दृष्टिकोण अपनाकर और एनसीआर क्षेत्र में नियमों, प्रवर्तन तथा प्रोत्साहनों को एकरूप बनाकर दिल्ली की वायु गुणवत्ता में दीर्घकालिक और सार्थक सुधार हासिल किए जा सकते हैं।

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