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IREDA ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए MNRE के साथ प्रदर्शन समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए ‘अत्यधिक गर्मी गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए खतरा’ विदेशी धरा पर हिंदी की सुगंध, साहित्यकारों ने छोड़ी भारतीय संस्कृति की अमिट छाप SAIL ने हॉट मेटल, क्रूड स्टील और फिनिश्ड स्टील के उत्पादन में H1 FY27 का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया श्याम मेटलिक्स ने चंद्रपुर में 50,000 करोड़ रुपये का एकीकृत इस्पात परिसर स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को वन्य क्षेत्र में छोड़ा

‘अत्यधिक गर्मी गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए खतरा’

UN Climate Change Executive Secretary Simon Stiell
UN Climate Change Executive Secretary Simon Stiell

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन की एक नई स्टडी में सामने आया है कि अत्यधिक गर्मी गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए खतरा बढ़ा रही है। यूएन क्लाइमेट चेंज के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने एक महत्वपूर्ण भाषण में कहा कि जलवायु संकट के बीच गर्भावस्था, प्रसव और मातृ स्वास्थ्य एक चिंताजनक नई चुनौती के रूप में उभर रहे हैं और अत्यधिक गर्मी की स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

इस अध्ययन के लिए पांच देशों (ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, ब्रिटेन और जिम्बाब्वे) तथा पांच अलग-अलग महाद्वीपों के 1,000 मातृ स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सर्वे के जरिए आंकड़े जुटाए गए। सर्वे में शामिल लगभग सभी विशेषज्ञों ने ऐसी गर्भवती महिला (98%) या शिशु (99%) की देखभाल की है, जिनके स्वास्थ्य पर उनके आकलन के अनुसार अत्यधिक गर्मी का प्रभाव पड़ा। करीब तीन-चौथाई (73%) विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गर्मी से जुड़े मामलों या जटिलताओं में वृद्धि हुई है।

यह सर्वे स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्रित वैश्विक फाउंडेशन वेलकम के लिए कराया गया था। यह एक नई पहल की शुरुआत का हिस्सा है, जिसे वेलकम और उसके अन्य साझेदारों के नेतृत्व में शुरू किया जा रहा है। इस पहल में अत्यधिक गर्मी के प्रभाव से महिलाओं, शिशुओं, स्वास्थ्य प्रणालियों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर कार्रवाई का आह्वान शामिल है।

शोध के अनुसार, तापमान में प्रत्येक 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि समय से पहले प्रसव के मामलों में 5% और गर्भावस्था के दौरान मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) के मामलों में 7% वृद्धि से संबंधित है।

साइमन स्टील ने कहा, “तस्वीर स्पष्ट और बेहद चिंताजनक है। जैसे-जैसे अत्यधिक गर्मी बढ़ रही है, गर्भावस्था और प्रसव अब वैश्विक जलवायु संकट में एक नई चुनौती बन गए हैं, जो संभावित रूप से घातक हो सकती है। इस चुनौती को जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली पीड़ा, असमानता और अन्याय की एक और गहरी खाई नहीं बनने देना चाहिए।”

कार्यकारी सचिव ने आगे कहा, “बदलती जलवायु को कभी भी इस वजह के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए कि गर्भावस्था और प्रसव कम सुरक्षित हो जाएं। नवजात शिशु को स्वस्थ शुरुआत मिले, यह कभी भी परिवार की गर्मी से बचने की क्षमता पर निर्भर नहीं होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “जब ठंडक पाने के लिए कोई ठंडी जगह ही उपलब्ध न हो, तो ‘ठंडा रहना’ केवल एक विकल्प नहीं रह जाता। सुरक्षित प्रसव पहले से ही अक्सर भौगोलिक स्थिति, आय और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से प्रभावित होता है। कार्रवाई के अभाव में अत्यधिक गर्मी इस अन्याय को और बढ़ाएगी। हम यह नहीं होने दे सकते कि बिगड़ते जलवायु प्रभाव दुनियाभर के प्रसूति वार्डों और परिवारों के लिए स्थायी बाधा बन जाएं।”

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