नई दिल्ली: भारतीय गैर-सरकारी व्यापार संघ नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (NASSCOM) ने शुक्रवार को भारत की कुछ आईटी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के अमेरिकी सरकार के फैसले की आलोचना की। अमेरिका ने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम के तहत नए आवेदन दाखिल करने पर भारत की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज सहित आठ आईटी और प्रौद्योगिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है।
NASSCOM ने शुक्रवार को कहा, “हालांकि यह फैसला आव्रजन के एक विशेष मार्ग को प्रभावित करता है, लेकिन NASSCOM लगातार यह कहता रहा है कि आव्रजन और कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही दो अलग-अलग मुद्दे हैं और इन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।”
भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र के इस संगठन ने आगे कहा, “H-1B वीजा कार्यक्रम ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिका में अल्पकालिक कौशल की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भविष्य में भी प्रतिभाओं की अल्पकालिक कमी को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल जारी रहेगा। हालांकि, पिछले कई वर्षों में भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों ने H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता काफी कम की है। इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां बढ़ाई हैं और अमेरिका में मजबूत घरेलू कार्यबल तैयार किया है। ये कंपनियां अमेरिका की फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से अधिकांश के साथ काम करती हैं, उन्हें नवाचार और विकास में सक्षम बनाती हैं तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर पैदा करती हैं।”
NASSCOM ने आगे कहा, “इसी कारण PERM प्रक्रिया के जरिए H-1B वीजा से स्थायी निवास में बदलाव करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी अपेक्षाकृत सीमित है। भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां 80 से अधिक देशों में काम करती हैं और उन्होंने स्थानीय कानूनों तथा नियामकीय आवश्यकताओं के अनुपालन के प्रति लगातार अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। हमें विश्वास है कि ये कंपनियां अमेरिका में भी लागू नियमों का पालन करती रहेंगी।”







