नई दिल्ली: टाटा पावर और इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए सहयोग की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस सहयोग के तहत ग्रिड की लचीलेपन क्षमता, ऊर्जा भंडारण, ऊर्जा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के अनुप्रयोग तथा उन्नत ऊर्जा प्रणालियों जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस साझेदारी का उद्देश्य बड़े स्तर पर ऊर्जा अवसंरचना के विकास और संचालन में टाटा पावर के अनुभव को डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कार्बन उत्सर्जन में कमी से संबंधित क्षेत्रों में इम्पीरियल कॉलेज की अनुसंधान विशेषज्ञता के साथ जोड़ना है।
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब भारत और ब्रिटेन स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में अपना सहयोग और मजबूत कर रहे हैं।
भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के तहत दोनों देशों ने ऊर्जा भंडारण और ग्रिड के रूपांतरण को अधिक सहयोग वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है। इसके साथ ही एआई, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर के क्षेत्रों में संयुक्त कार्य पर भी जोर दिया गया है। इस विजन में नेट ज़ीरो इनोवेशन पार्टनरशिप को डीप-टेक समाधानों और जलवायु नवाचार के लिए नए बाजारों को बढ़ावा देने के माध्यम के रूप में भी रेखांकित किया गया है।
इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए ब्रिटेन सरकार के व्यापार एवं व्यवसाय मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा, “जब ब्रिटेन की बेहतरीन अनुसंधान टीमें भारतीय कारोबार की महत्वाकांक्षा और विशेषज्ञता के साथ मिलकर काम करती हैं, तो वास्तविक बदलाव लाने की अपार संभावनाएं पैदा होती हैं। यह साझेदारी हमारे नए व्यापार समझौते के माध्यम से अवसरों को वास्तविकता में बदलने का एक शानदार उदाहरण है। इससे विचारों को स्वच्छ और अधिक स्मार्ट ऊर्जा समाधानों में बदलने में मदद मिलेगी, जिससे दोनों देशों में रोजगार और आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा।”
दक्षिण एशिया के लिए महामहिम के व्यापार आयुक्त और पश्चिमी भारत में ब्रिटेन के उप उच्चायुक्त हरजिंदर कांग ने कहा, “इम्पीरियल कॉलेज लंदन और टाटा पावर के बीच यह साझेदारी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि ब्रिटेन और भारत नवाचार को वास्तविक प्रभाव में बदलने के लिए अपनी क्षमताओं को किस तरह एक साथ ला सकते हैं। विश्वस्तरीय ब्रिटिश अनुसंधान और भारतीय औद्योगिक विशेषज्ञता को एक साथ लाने से अगली पीढ़ी के ऊर्जा समाधानों को विकसित करने में तेजी आएगी, नए व्यावसायिक अवसर खुलेंगे और दोनों देशों में सतत विकास को समर्थन मिलेगा।”
टाटा पावर के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा, “भारत का ऊर्जा परिवर्तन ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा की वृद्धि की गति जितनी महत्वपूर्ण होगी, उतनी ही महत्वपूर्ण बड़े पैमाने पर ऊर्जा उपलब्ध कराने, लचीलापन बनाए रखने और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की क्षमता भी होगी। ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और डिजिटल ऊर्जा प्रणालियों की अगली पीढ़ी को तेजी से बदलती मांग को पूरा करने के लिए एक-दूसरे के साथ समन्वय में काम करना होगा। इम्पीरियल कॉलेज के साथ हमारा सहयोग गहन अनुसंधान और नए विचारों के माध्यम से उद्योग की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेगा। साथ ही, ऐसे समाधानों की संभावनाएं तलाशेगा, जो न केवल भारत की ऊर्जा यात्रा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।”
यह साझेदारी अनुसंधान और नवाचार को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। टाटा पावर के पास बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है, जबकि इम्पीरियल कॉलेज ऊर्जा प्रणालियों, इंजीनियरिंग, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, अर्थशास्त्र और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान क्षमताएं प्रदान करता है।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन की वाइस प्रोवोस्ट (रिसर्च एंड एंटरप्राइज) प्रोफेसर मैरी रयान ने कहा, “दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक के रूप में टाटा पावर के पास ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की विभिन्न श्रेणियों में विशेषज्ञता और अधिक स्वच्छ एवं मजबूत ऊर्जा प्रणालियां विकसित करने के लिए आवश्यक व्यापक क्षमता है। ये ऐसी प्रणालियां हैं, जिनकी हमें तत्काल आवश्यकता है। यही वजह है कि टाटा पावर इम्पीरियल के लिए एक बेहतरीन साझेदार है। इम्पीरियल विज्ञान, इंजीनियरिंग और व्यवसाय के क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अत्याधुनिक अनुसंधान क्षमताओं के साथ-साथ समन्वित विज्ञान का एक ऐसा मॉडल भी प्रस्तुत करता है, जो अलग-अलग विषयों की सीमाओं से आगे बढ़कर उन चुनौतियों का समाधान तलाशता है, जिनसे निपटने के लिए नवाचार के पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं।”
इन क्षमताओं को एक साथ लाकर इस साझेदारी का उद्देश्य ऐसे समाधानों के विकास और प्रदर्शन को समर्थन देना है, जो अधिक लचीली, मजबूत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण में योगदान दे सकें। इसके साथ ही, भारत और ब्रिटेन के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार के नए अवसर भी पैदा होंगे।







