नई दिल्ली: जी-7 देशों ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया। साथ ही, ईंधन, गैस और अन्य जिंस बाजारों पर संकट के और अधिक प्रभाव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और वैश्विक साझेदारों के साथ काम करने पर सहमति जताई।
ऊर्जा सुरक्षा के सामने बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए जी-7 देशों के नेताओं ने वर्चुअल बैठक की।
एक प्रेस बयान में जी-7 देशों ने कहा, “तेल बाजार में अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए, जहां बढ़ती कीमतें आर्थिक स्थिरता और हमारे नागरिकों के कल्याण के लिए खतरा पैदा कर रही हैं, हमने ऊर्जा की तत्काल आपूर्ति को स्थिर करने, परिवारों और कारोबारों को कीमतों में अचानक वृद्धि से बचाने तथा वैश्विक ऊर्जा प्रणालियों की दीर्घकालिक मजबूती बढ़ाने के लिए निर्णायक और समन्वित उपायों पर सहमति जताई है।”
जी-7 कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका से मिलकर बना अंतर-सरकारी राजनीतिक और आर्थिक मंच है।
दुनिया के इस प्रमुख आर्थिक मंच ने आगे कहा, “हम जी-7 देशों की रिफाइनरियों में रखरखाव के कार्यक्रमों का समन्वय करेंगे, ताकि उनकी क्षमता एक साथ बंद न हो और जहां संभव हो, वहां अस्थायी रूप से उनकी उपयोग दर बढ़ाई जा सके। हम उन देशों के साथ भी बातचीत को प्रोत्साहित करते हैं, जिनके पास पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता है, ताकि परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से डीजल का वैश्विक उत्पादन बढ़ाया जा सके। ऐसा इस क्षेत्र में जारी बाजार दबाव को देखते हुए किया जाएगा।”
जी-7 ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से मार्च 2026 में की गई प्रतिबद्धताओं के तत्काल और पूर्ण कार्यान्वयन की निगरानी करने का अनुरोध किया है। पहले ही पूरी की जा चुकी प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए, जी-7 देश अगले चार महीनों में IEA के समन्वय से 100 मिलियन बैरल (एमबी) तेल जारी करने की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे। इसकी शुरुआत तत्काल की जाएगी। इसमें जी-7 देशों और साझेदारों की ओर से पहले 20 दिनों के भीतर डीजल की बड़ी मात्रा जारी करने को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर डीजल की अतिरिक्त मात्रा जारी करने की संभावना पर चर्चा के लिए जी-7 देश आने वाले दिनों में IEA के मंच पर बैठक करेंगे।
जी-7 ने सदस्य देशों के बीच ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, सभी उत्पादक देशों से ऐसे प्रतिबंध लगाने से बचने का आह्वान किया, जो बाजार में तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
जी-7 देशों ने IEA से इन उपायों के ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव तथा प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की निगरानी करने का अनुरोध किया। एजेंसी से 20 दिनों के भीतर एक अनुवर्ती रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसमें भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को बेहतर बनाने के लिए लागू किए जा सकने वाले सुझाव शामिल होंगे, जिनमें भंडार की पुनःपूर्ति भी शामिल है।
जी-7 नेताओं ने ईरान की ओर से अपने क्षेत्रीय पड़ोसी देशों पर लगातार किए जा रहे हमलों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में बाधा डालने की निंदा की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन अधिकारों और सिद्धांतों की तत्काल तथा पूर्ण बहाली की मांग की और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयासों को दोगुना करने का संकल्प जताया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका के प्रयासों की भी सराहना की।
जी-7 नेताओं ने कहा, “ऊर्जा की कीमतों को लेकर हमारे नागरिकों की चिंताएं हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। हम घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेंगे और आवश्यकता के अनुसार उपायों में बदलाव करने के लिए तैयार रहेंगे। आज हुए समझौते अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और मजबूत ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक कदम हैं।”







