मुंबई: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित हो रहे ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026’ में कहा कि भविष्य का राजमार्ग सिर्फ एक भौतिक सड़क नहीं बल्कि एक डिजिटल मार्ग होगा। सरकार अब टोल वाले मार्गों पर वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग को मजबूत करने के लिए फास्टैग (FASTag) डेटा को ऑटोमैटिक नंबर-प्लेट रिकग्निशन के साथ जोड़ने पर विचार कर रही है। श्री गडकरी ने कहा, “इस संयुक्त प्रणाली से टोल राजस्व में सालाना 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होने की उम्मीद है।”
मोबिलिटी फाइनेंस के भविष्य पर एक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पूरी तरह से डिजिटल और अंततः बाधा-मुक्त (बैरियर-फ्री) टोलिंग की ओर बढ़ रहा है। फरवरी 2027 के आसपास टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम चालू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, “फास्टैग ने टोल संग्रह को पूरी तरह बदल दिया है। हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि वाहनों को टोल प्लाजा पर बिल्कुल भी न रुकना पड़े।” 2021 में फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया था। श्री गडकरी ने आगे जोड़ा, “और आज इसके परिणाम हमारे सामने हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर फास्टैग की पहुंच 98% से अधिक है, और अब तक 13 करोड़ से अधिक फास्टैग जारी किए जा चुके हैं।”
श्री गडकरी ने बताया कि 2021 में फास्टैग को अनिवार्य बनाए जाने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर नकद भुगतान से इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह की ओर बदलाव में तेजी आई।
फास्टैग अपनाने के बाद टोल प्लाजा पर प्रतीक्षा समय, जो कभी लगभग 12 मिनट हुआ करता था, उसमें 80-90 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि फास्टैग-सक्षम टोलिंग ने देश में सालाना अनुमानित 71 करोड़ घंटे बचाए हैं, जो प्रति वर्ष लगभग 68,500 करोड़ रुपये के आर्थिक मूल्य के बराबर है।
उन्होंने डिजिटल भुगतान से इंटेलिजेंट मोबिलिटी की ओर बढ़ने की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करते हुए फास्टैग, यूपीआई और आधार से जुड़े मोबिलिटी डेटा को एक एकल कनेक्टेड इकोसिस्टम में एक साथ लाने का आह्वान किया। इसके अलावा, देश में सड़क दुर्घटनाओं के उच्च वार्षिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने सड़क सुरक्षा को एक प्राथमिकता बताया।
श्री गडकरी ने कहा, “मैं दो प्रमुख सिद्धांतों में विश्वास करता हूँ: नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करना, और फिर उस ज्ञान को संपत्ति (वेल्थ) में परिवर्तित करना।” उन्होंने आगे कहा कि उपयुक्त नेतृत्व के सहयोग से प्रौद्योगिकी में संसाधनों को संपत्ति में बदलने की शक्ति है।
GFF 2026 का आयोजन पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (FCC) द्वारा किया गया है। इस सम्मेलन को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY); वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय; नया, उभरता और रणनीतिक प्रौद्योगिकी (NEST) प्रभाग, विदेश मंत्रालय; नीति आयोग; भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI); भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI); अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA); और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) का समर्थन प्राप्त है।







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