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सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सुरक्षा, प्रदर्शन और राष्ट्रीय लाभों को रेखांकित किया बायर ने अगली पीढ़ी का कीटनाशक ट्रांस™️ लॉन्च किया सोना कॉमस्टार ने इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड पावरट्रेन सिस्टम विकसित करने के लिए डेंसो से साझेदारी की Praveg Limited बोर्ड ने इक्विटी शेयरों और परिवर्तनीय वारंट के जरिए 53.72 करोड़ रुपये के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार हरियाणा राज्य भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के उपाध्यक्ष नियुक्त Servotech Renewable ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय परिणाम दर्ज किए; स्टैंडअलोन राजस्व 66% बढ़ा

सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सुरक्षा, प्रदर्शन और राष्ट्रीय लाभों को रेखांकित किया

Hardeep Singh Puri, Union Minster of Petroleum and Natural Gas

नई दिल्ली: सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रण संबंधी कोई भी फैसला विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तथा ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी), अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा। हालांकि, 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल वाले E85 ईंधन को केवल उन फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए शुरू किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से इस ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। इसका अर्थ देशभर में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के आधार स्तर को बढ़ाना नहीं है।

वर्तमान में निर्धारित इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत तथा पिछले तीन वर्षों में वर्षवार प्राप्त औसत इथेनॉल मिश्रण का विवरण निम्नानुसार है।

सरकार ने बताया कि इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग विश्वभर में एक सदी से अधिक समय से हो रहा है और ब्राजील जैसे देशों में दशकों से अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माता, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) तथा अन्य तकनीकी संस्थानों की सहभागिता से चरणबद्ध और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया गया।

सरकार के अनुसार, भारत ने निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि दो दशकों से अधिक समय तक नीति निर्माण, वैज्ञानिक मूल्यांकन, हितधारकों से परामर्श और आवश्यक क्षमता निर्माण के बाद संभव हुई है।

सरकार ने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों, फील्ड परीक्षणों और वास्तविक उपयोग के व्यापक अनुभव से यह साबित हुआ है कि निर्धारित मानकों और वाहन निर्माता की सिफारिशों के अनुसार उपयोग किए जाने पर E20 ईंधन सुरक्षित, अधिक स्वच्छ और तकनीकी रूप से बेहतर ईंधन है। सरकार का आकलन केवल प्रयोगशाला अनुसंधान पर नहीं बल्कि देशभर में इसके व्यापक उपयोग के अनुभव पर आधारित है।

सरकार के अनुसार, E15+ मिश्रित पेट्रोल का उपयोग पिछले साढ़े तीन वर्षों से और E19-E20 ईंधन का उपयोग पिछले ढाई वर्षों से व्यापक स्तर पर हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चली हैं, लेकिन इथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।

वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड के अनुसार E20 ईंधन से असामान्य जंग, घिसाव या वाहन की आयु में कमी नहीं देखी गई है। वाहन निर्माता E20 उपयोग करने वाले वाहनों की वारंटी भी सामान्य रूप से जारी रखे हुए हैं।

देश की एक प्रमुख यात्री वाहन निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ पुराने, गैर-E20 प्रमाणित वाहन भी शामिल थे। इसके बावजूद E20 से संबंधित इंजन क्षति या असामान्य घिसाव का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। इसी तरह एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी अपने व्यापक सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि E20 पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में नुकसान की अधिक घटनाएं नहीं मिलीं।

सरकार ने कहा कि वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संगठनों या उपभोक्ता संगठनों से E20 ईंधन के कारण माइलेज में भारी कमी, वाहन की गति कम होने या पेट्रोल टैंक में जंग लगने जैसी व्यापक और प्रमाणित शिकायतें प्राप्त नहीं हुई हैं। हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया में उठाई गई कुछ चिंताओं का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया है।

नीति आयोग के तहत गठित अंतर-मंत्रालयी समिति, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), ARAI, IIP और SIAM द्वारा किए गए परीक्षणों में पुष्टि हुई कि E20 ईंधन से असामान्य घिसाव या ईंधन प्रणाली से जुड़ी कोई अनुकूलता संबंधी समस्या नहीं होती।

सरकार ने बताया कि माइलेज कई कारकों जैसे सड़क की स्थिति, ड्राइविंग शैली और वाहन के रखरखाव पर निर्भर करता है। E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता में लगभग 3-5% तक कमी हो सकती है, लेकिन E20 में उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, स्वच्छ दहन और इंजन के बेहतर प्रदर्शन जैसे लाभ मिलते हैं।

सरकार ने कहा कि ऑटोमोबाइल निर्माता, पुर्जा आपूर्तिकर्ता, SIAM, ARAI, परीक्षण एजेंसियां और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां E20 के वैज्ञानिक मूल्यांकन और चरणबद्ध क्रियान्वयन के प्रत्येक चरण में शामिल थीं। ईंधन प्रणाली, इंजन की टिकाऊ क्षमता, ड्राइविंग प्रदर्शन, सामग्री की अनुकूलता और उत्सर्जन प्रदर्शन का सफल परीक्षण होने के बाद ही E20 लागू किया गया।

SIAM और ARAI के अनुसार E20 से वाहन की गति पकड़ने की क्षमता और ड्राइविंग गुणवत्ता में सुधार होता है तथा कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इथेनॉल की उच्च ऑक्टेन संख्या आधुनिक उच्च संपीड़न इंजन के लिए उपयुक्त है और इसकी अधिक वाष्पीकरण ऊष्मा दहन दक्षता बढ़ाती है।

सरकार के अनुसार, E20 में बदलाव से देश को बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिले हैं। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात प्रतिस्थापित, करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी तथा किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार ने दोहराया कि उसकी नीति राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति तथा ऊर्जा सुरक्षा और उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों के अनुरूप स्वच्छ, अधिक दक्ष और पर्यावरण अनुकूल ईंधनों की ओर क्रमिक रूप से बढ़ने की है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 के व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और ऑटोमोबाइल उद्योग द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के बाद E0 या E10 पेट्रोल पर वापस लौटने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का उद्देश्य बेहतर और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ईंधन को अपनाना है, न कि पुराने मानक पर लौटना।

सरकार के अनुसार, देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 की समानांतर आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना लॉजिस्टिक्स, भंडारण और संचालन लागत को काफी बढ़ा देगा। इसलिए सार्वजनिक नीति में उपभोक्ता सुविधा के साथ ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

सरकारी क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने E20 सहित सभी ईंधनों से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए मजबूत उपभोक्ता शिकायत प्रणाली विकसित की है। उपभोक्ता पेट्रोल पंपों पर शिकायत रजिस्टर, टोल-फ्री हेल्पलाइन, कंपनी की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सीआरएम प्रणाली, सोशल मीडिया, ई-मेल और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सभी शिकायतों की निर्धारित समय सीमा में जांच कर उनका निस्तारण किया जाता है।

सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को E20 की तकनीकी अनुकूलता, उसके सुरक्षित उपयोग तथा पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी लाभों के बारे में जागरूक करने के लिए नियमित जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। साथ ही उपभोक्ताओं से प्राप्त सुझावों और शिकायतों की लगातार निगरानी कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे।

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