नई दिल्ली: इस महीने लगातार दो दिनों (13 और 14 जुलाई) में पहली बार देश की कुल बिजली आपूर्ति में परिवर्तनीय अक्षय ऊर्जा (VRE), यानी सौर और पवन ऊर्जा का योगदान 100 गीगावाट (GW) के आंकड़े को पार कर गया। इसके साथ ही कुल बिजली आपूर्ति में वीआरई की हिस्सेदारी 42.79% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई।
13 जुलाई 2026 को दोपहर 12:05 बजे ग्राउंड-आधारित वीआरई से तात्कालिक बिजली उत्पादन 103.7 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले शाम के समय पवन ऊर्जा उत्पादन 36.6 गीगावाट के उच्चतम स्तर को पार कर गया था। अगले दिन भी वीआरई उत्पादन और इसकी हिस्सेदारी लगभग इसी स्तर पर बनी रही।
गर्मी के मौसम में लू की स्थिति, शीतलन (कूलिंग) की बढ़ती मांग और विद्युत उपकरणों के उपयोग में वृद्धि के कारण भारत की अधिकतम बिजली मांग दो अवसरों पर रिकॉर्ड 270 गीगावाट तक पहुंच गई। मांग में इस तेज वृद्धि के बावजूद देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में परिवर्तनीय अक्षय ऊर्जा (वीआरई) की भूमिका लगातार बढ़ती रही। 25 अप्रैल को जब बिजली की मांग रिकॉर्ड 270 गीगावाट पर पहुंची, तब सौर ऊर्जा ने पीक डिमांड के दौरान 57 गीगावाट तथा दोपहर में 81 गीगावाट बिजली का योगदान दिया, जो अब तक का सर्वाधिक दर्ज सौर ऊर्जा उत्पादन था।
अप्रैल से अब तक गर्मियों के दौरान भारत की कुल बिजली आपूर्ति में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी 35% से 42% के बीच रही है। वहीं, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा को भी शामिल करने पर देश की कुल बिजली आपूर्ति में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 50% रही है।







