Mumbai: वैश्विक बाजारों के लिए प्रीमियम-ग्रेड एपीआई (API), इंटरमीडिएट्स और न्यूट्रिशनल प्रीमिक्स का भारत का अग्रणी निर्माता फरमेंटा बायोटेक लिमिटेड ने सोमवार को घोषणा की कि उसके प्लांट-आधारित विटामिन D3 (कोलेकैल्सीफेरॉल) VITADEE Green® को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से स्वास्थ्य अनुपूरकों (हेल्थ सप्लीमेंट्स), न्यूट्रास्यूटिकल्स और खाद्य उत्पादों में एक घटक (इंग्रीडिएंट) के रूप में उपयोग की मंजूरी मिल गई है।
इस मंजूरी के बाद भारत के खाद्य एवं सप्लीमेंट निर्माता VITADEE Green® का उपयोग फोर्टिफाइड (पोषण-संवर्धित) मुख्य खाद्य पदार्थों, खाद्य एवं पेय उत्पादों, आहार अनुपूरकों (डाइटरी सप्लीमेंट्स) और न्यूट्रास्यूटिकल्स में कर सकेंगे। इससे देश में पोषण संबंधी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक—विटामिन D की कमी—को दूर करने में मदद मिलेगी। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, भारत की बड़ी आबादी में विटामिन D का स्तर पर्याप्त नहीं है। शहरीकरण, घर के भीतर अधिक समय बिताने की जीवनशैली और पर्याप्त धूप न मिलना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
फरमेंटा बायोटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रशांत नागरे ने कहा, “भारत में विटामिन D की कमी आज भी एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है और टिकाऊ (सस्टेनेबल) पोषण संबंधी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। FSSAI की मंजूरी से अब हम VITADEE Green® को सीधे भारतीय फूड फोर्टिफिकेशन और न्यूट्रास्यूटिकल निर्माता कंपनियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे देश की विशाल आबादी में पोषण संबंधी कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, “सतत, बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य और किफायती प्लांट-आधारित विटामिन D3 प्रक्रिया विकसित करने और उसका पेटेंट कराने वाली शुरुआती भारतीय कंपनियों में शामिल होने के कारण हम राष्ट्रीय स्तर पर इस कमी से निपटने की मजबूत स्थिति में हैं। भारत में विकसित और निर्मित VITADEE Green® ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती देता है, क्योंकि यह भारतीय उत्पाद निर्माताओं के लिए आत्मनिर्भर घरेलू विकल्प उपलब्ध कराता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि VITADEE Green® भारतीय निर्माताओं को पूरी तरह प्लांट-आधारित स्रोत से बेहतर गुणवत्ता वाला विटामिन D3 उपलब्ध कराता है, जबकि अब तक उन्हें अक्सर विटामिन D2 पर निर्भर रहना पड़ता था। यह हमारे ग्राहकों और समाज के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, अभिनव और टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
भारत के शाकाहारी उपभोक्ताओं के लिए, जिन्हें अब तक प्लांट-आधारित विटामिन D3 के सीमित विकल्प उपलब्ध थे, यह मंजूरी देश में निर्मित और नियामकीय स्वीकृति प्राप्त उत्पाद का नया विकल्प लेकर आई है। साथ ही, यह खाद्य फोर्टिफिकेशन के माध्यम से विटामिन D की कमी दूर करने के राष्ट्रीय प्रयासों को भी समर्थन देती है। इस क्षेत्र में नियामक संस्थाएं हाल के वर्षों में प्लांट-आधारित स्रोतों को अधिक प्रोत्साहन दे रही हैं।







