मुंबई: द टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की सहायक कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) ने महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में अपनी 100.8 मेगावाट क्षमता वाली जेवाली पवन ऊर्जा परियोजना का संचालन शुरू कर दिया है। इस परियोजना से उत्पादित बिजली की आपूर्ति टाटा पावर मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन को की जाएगी, जिससे कंपनी को अपने रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी और अधिक टिकाऊ तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार यूटिलिटी बनने की दिशा में उसका प्रयास मजबूत होगा।
यह परियोजना बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में TPREL की मजबूत क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह उपलब्धि कंपनी के बढ़ते अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो को और मजबूत करती है तथा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में उसकी अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है।
इस परियोजना में उन्नत हॉरिजॉन्टल-एक्सिस विंड टर्बाइन तकनीक पर आधारित 28 एसजी 3.6-145 विंड टर्बाइन जनरेटर लगाए गए हैं। इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 299 मिलियन यूनिट (किलोवाट-घंटा) स्वच्छ बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है।
परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 245 मिलियन किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन की भरपाई होने का अनुमान है। यह अनुमान प्रति यूनिट बिजली उत्पादन पर 0.82 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी के आधार पर लगाया गया है। इससे डीकार्बोनाइजेशन के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा और टाटा पावर के स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही TPREL का पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो 3.9 गीगावाट से अधिक हो गया है। इसमें 1.3 गीगावाट से अधिक परिचालन क्षमता शामिल है, जबकि शेष क्षमता राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में विभिन्न विकास चरणों में है।
यह परियोजना वर्ष 2045 तक 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन हासिल करने के टाटा पावर के दीर्घकालिक विजन को भी आगे बढ़ाती है और उसके विस्तारित अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो को पूरक बनाती है।
जेवाली पवन ऊर्जा परियोजना के जुड़ने के साथ TPREL की कुल यूटिलिटी-स्तरीय अक्षय ऊर्जा क्षमता 11.6 गीगावाट तक पहुंच गई है। इसमें 6.7 गीगावाट परिचालन क्षमता शामिल है, जिसमें 5.4 गीगावाट सौर और 1.3 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता है, जबकि 4.9 गीगावाट क्षमता विभिन्न कार्यान्वयन चरणों में है। निर्माणाधीन पोर्टफोलियो में लगभग 2.1 गीगावाट सौर, 2.6 गीगावाट पवन ऊर्जा परियोजनाएं और 0.2 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शामिल हैं, जिन्हें अगले 6 से 24 महीनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाने की उम्मीद है।







