नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 7 जून 2026 को असम की जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप को दुबई भेजने में सुविधा प्रदान की। यह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
एक मीट्रिक टन की इस खेप में जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची शामिल थी, जो असम के सबसे प्रसिद्ध बागवानी उत्पादों में से एक है। यह अपनी असाधारण मिठास, चमकीले लाल रंग, विशिष्ट सुगंध और बेहतर स्वाद के लिए जानी जाती है। इस क्षेत्र में बॉम्बाया, बिलाती, इलायची, पियाजी और साही जैसी कई प्रमुख किस्मों की खेती की जाती है, जिन्हें उनके विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।
भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा मिलने से तेजपुर लीची की पहचान और बाजार में उसकी स्वीकार्यता मजबूत हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच इसकी मांग बढ़ी है और असम से प्रीमियम कृषि उत्पादों के निर्यात के नए अवसर पैदा हुए हैं। यह निर्यात वैश्विक बाजारों में भारत के जीआई-टैग प्राप्त कृषि उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाता है तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विशाल निर्यात क्षमता को रेखांकित करता है, जहां उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की विविध श्रृंखला उपलब्ध है।
इस खेप को औपचारिक रूप से रवाना करने के अवसर पर तेजपुर के विधायक पृथ्वीराज रावा, असम सरकार की कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया (आईएएस), एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव (आईएएस), सोनितपुर के जिला आयुक्त आनंद कुमार दास (एसीएस) तथा एम/एस डीएमआर ग्रीन वैली एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में किसानों, निर्यातकों, असम सरकार के अधिकारियों, एपीडा के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने भी भाग लिया।
इस पहल का एक प्रमुख परिणाम किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होना रहा। निर्यात आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े उत्पादकों को घरेलू बाजार में प्रचलित कीमतों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला, जबकि स्थानीय स्तर पर मांग मजबूत बनी हुई थी। इस खेप ने लीची उत्पादकों के लिए नए विपणन अवसर तैयार किए हैं और निर्यातोन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है, जिससे आय में वृद्धि और सतत आजीविका के अवसर सृजित होंगे।
एपीडा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना विकास, गुणवत्ता आश्वासन एवं प्रमाणन सहायता, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, निर्यातोन्मुख उत्पादन पद्धतियों तथा बाजार संपर्क पहलों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। राज्य सरकारों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर सहयोग के माध्यम से एपीडा किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने और क्षेत्र-विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए नए निर्यात अवसर सृजित करने में सहायता कर रहा है।
दुबई को तेजपुर लीची का यह सफल निर्यात भविष्य में बड़े पैमाने पर निर्यात का मार्ग प्रशस्त करने और असम के जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करने की उम्मीद है। यह पहल उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की स्थापना वर्ष 1985 में एपीडा अधिनियम के तहत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। एपीडा का दायित्व अधिसूचित कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। यह गुणवत्ता विकास, क्षमता निर्माण, अवसंरचना सहायता और बाजार संवर्धन पहलों के माध्यम से निर्यातकों, किसानों और एफपीओ को सहयोग प्रदान करता है। इन प्रयासों के जरिए एपीडा भारतीय कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, बाजार विविधीकरण और निर्यात अवसरों के विस्तार को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।







