New Delhi: Hitachi Energy India Limited ने जनवरी से मार्च 2026 (Q4FY26) और 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय वर्ष (FY26) के परिणामों की घोषणा की।

31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष के परिणाम:
Hitachi Energy India Limited ने चौथी तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष का समापन मजबूत प्रदर्शन के साथ किया। परिचालन दक्षता और प्रभावी ऑर्डर निष्पादन पर निरंतर ध्यान देने से कंपनी ने तिमाही और पूरे FY26 में अपनी वृद्धि की गति बनाए रखी।
तिमाही परिणामों पर टिप्पणी करते हुए N Venu ने कहा, “Q4 और पूरे वर्ष के परिणाम कंपनी की कार्यक्षमता को सभी क्षेत्रों में बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। साथ ही मजबूत परियोजना क्रियान्वयन के माध्यम से ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। हाल ही में मुंबई में शुरू किया गया भारत का पहला HVDC सिटी सेंटर इनफीड, Hitachi Energy India Limited की समय पर निष्पादन क्षमता का प्रमाण है। मजबूत ऑर्डर बैकलॉग और दीर्घकालिक योजना ने अस्थिर भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी कंपनी की वृद्धि की गति को बनाए रखा है।”
वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति भारत की संवेदनशीलता महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड में निवेश के महत्व को दोहराती है। ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत के ऊर्जा परिवर्तन से लाभ मिलने की संभावना है। कंपनी के तिमाही परिणाम इसी उद्योग परिदृश्य को दर्शाते हैं और कंपनी ने दीर्घकालिक विकास कारकों पर ध्यान बनाए रखते हुए इसे प्रभावी ढंग से संभाला है।
ऑर्डर
Q4FY26 के दौरान कंपनी को कुल 2,422.5 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले, जो सालाना आधार पर 10.6% अधिक हैं। इस तिमाही में ऑर्डर बुक में HVDC कंट्रोल सिस्टम रिफर्बिशमेंट, ग्रिड कनेक्शन समाधान, ट्रांसफॉर्मर और डिस्कनेक्टर सप्लाई से जुड़े ऑर्डर प्रमुख रहे। सेगमेंट के हिसाब से डेटा सेंटर सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा, इसके बाद रेल और मेट्रो का स्थान रहा।
Q4FY26 में कुल ऑर्डर बुकिंग में निर्यात की हिस्सेदारी 36.8% रही। कंपनी को अमेरिका, यूरोप और APAC क्षेत्र से निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुए। वहीं सेवा क्षेत्र का योगदान Q4 ऑर्डर बुक में 23.9% रहा। प्रमुख सेवा ऑर्डरों में राज्य उपयोगिता, डेटा सेंटर, ट्रांसमिशन और उद्योगों के लिए सिस्टम रिफर्बिशमेंट, SCADA अपग्रेड और लाइफ साइकिल सेवाएं शामिल रहीं।
पिछली तीन तिमाहियों में कंपनी की निरंतर वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव Q4FY26 में ऑर्डर बैकलॉग पर पड़ा। 31 मार्च 2026 तक कुल ऑर्डर बैकलॉग बढ़कर 29,555.3 करोड़ रुपये हो गया, जिससे आने वाली कई तिमाहियों के लिए मजबूत राजस्व दृश्यता मिली है।
राजस्व
परियोजनाओं, उत्पादों और सेवाओं में मजबूत ऑर्डर निष्पादन और रणनीतिक दृष्टिकोण के चलते कंपनी ने Q4FY26 में राजस्व वृद्धि बनाए रखी। तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 46.2% बढ़कर 2,754.1 करोड़ रुपये पहुंच गया।
मुनाफा
कंपनी ने कर पूर्व लाभ (PBT) और कर पश्चात लाभ (PAT) में मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की। Q4FY26 में PBT और PAT दोनों में लगभग 80% की वृद्धि हुई। PBT 443.4 करोड़ रुपये (79.7%) और PAT 330.5 करोड़ रुपये (79.7%) रहा।
पूरा वित्तीय वर्ष
31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कंपनी को कुल 18,456.5 करोड़ रुपये के ऑर्डर प्राप्त हुए, जबकि परिचालन से राजस्व बढ़कर 8,147.7 करोड़ रुपये हो गया।
FY26 में कंपनी ने अपने 2030 स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप कई कदम उठाए। कंपनी ने 2019 के आधार वर्ष की तुलना में CO2 उत्सर्जन में 74% की कमी और लैंडफिल या दहन के लिए भेजे जाने वाले कचरे में 82% की कमी हासिल की। साथ ही FY26 में उत्पन्न 99% कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए प्रोसेस किया गया।
Hitachi Energy India Limited की हालोल विनिर्माण इकाई को FY26 के लिए वॉटर पॉजिटिव इंडेक्स के स्वतंत्र सत्यापन के बाद “वॉटर पॉजिटिव” प्रमाणन प्राप्त हुआ। इसके अलावा कंपनी की हालोल और मैसूर इकाइयों को “जीरो वेस्ट टू लैंडफिल” के लिए “प्लैटिनम लेवल” प्रमाणन मिला।
बोर्ड बैठक के परिणाम
31 मार्च 2026 को समाप्त वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर निदेशक मंडल ने 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 8 रुपये अंतिम लाभांश यानी 400% लाभांश की सिफारिश की है। यह आगामी वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन होगा।
बैठक के दौरान निदेशक मंडल ने गुजरात के वडोदरा जिले के करजन में एक ग्रीनफील्ड बड़े पावर ट्रांसफॉर्मर संयंत्र सहित अन्य परियोजनाओं की स्थापना के लिए 2,000 करोड़ रुपये के निवेश को भी मंजूरी दी। यह निवेश 7 अक्टूबर 2024 की प्रेस विज्ञप्ति में घोषित पूंजीगत व्यय के अतिरिक्त है, जिससे कुल कैपेक्स 4,000 करोड़ रुपये हो गया है।
आउटलुक
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता के शीर्ष पर पहुंचा दिया है। बिजली अब विकास का प्रमुख चालक बन चुकी है। बढ़ती बिजली मांग को पूरा करना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को ग्रिड में शामिल करना सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के समन्वित प्रयासों की मांग करने वाली दो प्रमुख चुनौतियां होंगी।
भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे महत्वपूर्ण इनपुट की उपलब्धता और लागत पर असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत के ऊर्जा क्षेत्र को अनिश्चितताओं के दौर से गुजरना होगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी मूल्य श्रृंखला में लागत दबाव बढ़ा रही हैं, विशेष रूप से भारत जैसे आयात-निर्भर देश में।
हालांकि, केंद्रीय बजट FY 2026-27 में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए अधिक धन आवंटन से देश के ऊर्जा इकोसिस्टम को गति मिलेगी। इसका स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और भारत को अपने ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।







