New Delhi: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUH) के शिक्षक शिक्षा विभाग में चल रही एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत तीन दिवसीय वर्कशॉप सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। यह वर्कशॉप “मानविकी और सामाजिक विज्ञान में रिसर्च टूल के विकास” पर आधारित थी, जो 21 से 23 मई तक चली। आईसीएसएसआर (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस ऑफलाइन वर्कशॉप में अलग-अलग कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स, रिसर्च स्कॉलर्स और प्रोजेक्ट स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस वर्कशॉप का मुख्य मकसद था कि लोग सोशल साइंस और आर्ट्स के क्षेत्र में रिसर्च करने के लिए सही टूल्स (जैसे- सवाल, प्रश्नावली या सर्वे के तरीके) बनाना, उन्हें परखना और उनका सही इस्तेमाल करना सीख सकें। इन तीन दिनों में आए हुए लोगों को थ्योरी के साथ-साथ खुद काम करके भी सिखाया गया।
वर्कशॉप की शुरुआत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने की। इसके बाद पहले सेशन में मशहूर प्रोफेसर कौशल किशोर ने बताया कि छात्रों की उपलब्धियों को जांचने के लिए टेस्ट कैसे तैयार किए जाते हैं, सवाल कैसे लिखे जाते हैं और टेस्ट का ब्लूप्रिंट कैसे बनता है। दूसरे सेशन में बताया गया कि रिसर्च टूल्स बनाने में कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी (ICT) का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। पहले दिन के आखिरी में प्रो. नंद किशोर की देखरेख में सभी प्रतिभागियों ने खुद टेस्ट पेपर तैयार करने का प्रैक्टिकल काम किया।
दूसरे दिन डॉ. हरीश पांडे ने रेटिंग स्केल और ‘लिकर्ट स्केल’ (जैसे- किसी बात से आप कितने सहमत या असहमत हैं, यह मापने का तरीका) पर लेक्चर दिया। उन्होंने सिखाया कि रिसर्च को भरोसेमंद कैसे बनाया जाए। दूसरे सेशन में डॉ. संजय कुमार ने ग्रुप डिस्कशन (FGD) और इंटरव्यू लेने के तरीकों के बारे में बताया, जिससे रिसर्च के लिए सही जानकारियां जुटाई जा सकें। इसके बाद सभी ने मिलकर ग्रुप में काम किया और खुद रेटिंग स्केल तैयार किए।
आखिरी दिन प्रतिभागियों ने वर्कशॉप के दौरान अपने बनाए टूल्स को सबके सामने पेश किया। इस दौरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. देवराज सिंह और डॉ. निधि बगारिया भी मौजूद रहीं, जिन्होंने प्रतिभागियों को गाइड किया।
समापन समारोह में वर्कशॉप के कोऑर्डिनेटर डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि अच्छी रिसर्च के लिए सही टूल्स का होना बहुत जरूरी है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. सुनील कुमार ने इस आयोजन की तारीफ की और कहा कि उच्च शिक्षा में ईमानदारी और नियम के साथ रिसर्च होनी चाहिए। रिसर्च डीन प्रो. नीलम सांगवान ने भी सभी को इस सीख को आगे इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट बांटे गए। प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार ने वर्कशॉप को सफल बनाने के लिए सभी मेहमानों, प्रोफेसर्स और स्टाफ का धन्यवाद किया। यह वर्कशॉप सभी प्रतिभागियों के लिए काफी फायदेमंद रही।







