नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को Sravanthi Group के प्रमोटर डी.वी. राव और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ताजा छापेमारी की तथा दो निदेशकों—डी.वी. राव और डी. शांति किरण—के साथ डी.वी. राव के भाई डी. अवनिंद्र कुमार को गिरफ्तार किया।
प्रवर्तन निदेशालय ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “डी.वी. राव, जो श्रावंती ग्रुप के प्रमोटर हैं, और उनके सहयोगियों के खिलाफ ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में लगभग 284 करोड़ रुपये की बड़े पैमाने पर धनशोधन गतिविधियों का खुलासा हुआ है। दो निदेशक—डी.वी. राव और डी. शांति किरण—साथ ही डी.वी. राव के भाई डी. अवनिंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है। विशेष अदालत ने तीनों को 12 मई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की।”
बैंक धोखाधड़ी और RTGS के दुरुपयोग का मामला
जांच की शुरुआत गुरुग्राम के सेक्टर-40 थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0360/2025 से हुई। आरोप है कि डी.वी. राव के नियंत्रण वाली कंपनी M/s DJW Electric Power Projects Private Ltd. ने विभिन्न संस्थाओं से धोखाधड़ी कर ऋण प्राप्त किए। ईडी जांच में अब तक सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े में लगभग 58 करोड़ रुपये के ऋण शामिल थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के खातों में यह दिखाया गया कि मूल ऋणदाताओं को भुगतान किया जा रहा है, लेकिन RTGS प्रणाली का दुरुपयोग कर भुगतान कोलकाता स्थित शेल कंपनियों के खातों में भेजा गया। इन शेल कंपनियों में Nexus International, Bhavtarini Sales Pvt. Ltd. और Gabel Trading Co. शामिल हैं।
SEPL मामले में 228 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई
ईडी की जांच के दौरान Sravanthi Energy Private Limited (SEPL) से जुड़ा एक और मामला सामने आया। एजेंसी के मुताबिक, SEPL हर महीने लगभग 75 लाख रुपये “कंसल्टेंसी फीस” के नाम पर M/s Verset Technologies Pvt. Ltd. को भुगतान कर रही थी, जो कथित रूप से एक शेल कंपनी थी। कंपनी का कोई कार्यालय या कर्मचारी नहीं था और यह डी.वी. राव के ससुर के नाम पर पंजीकृत थी। इस व्यवस्था के जरिए करीब 89.36 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई।
इसके अलावा, SEPL पर 100 से अधिक शेल कंपनियों के जरिए 139 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी खरीद दिखाने का आरोप है। ईडी के अनुसार, इन भुगतानों की राशि नकद के रूप में डी.वी. राव और उनके परिवार को वापस पहुंचाई गई। एजेंसी ने SEPL मामले में कुल अपराध आय (Proceeds of Crime) लगभग 228 करोड़ रुपये आंकी है।
बैंकों और निवेशकों को नुकसान का आरोप
ईडी जांच में यह भी सामने आया कि डी.वी. राव ने पहले बैंकों के बड़े ऋणों में डिफॉल्ट किया था, जिसके चलते SEPL एनपीए बन गई। इसके बाद बैंकों को वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) का सहारा लेना पड़ा, जिससे बैंकिंग प्रणाली को 1500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
एजेंसी का आरोप है कि कंपनी पर बढ़ते कर्ज के बावजूद डी.वी. राव व्यवस्थित तरीके से कंपनी के फंड को निजी लाभ के लिए निकालते रहे। इससे न केवल बैंकों बल्कि कंपनी के निवेशकों को भी नुकसान पहुंचा। गौरतलब है कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU Banks) कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी रखते हैं, जिससे यह मामला सार्वजनिक हित से भी जुड़ गया है।
तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने आरोपों की गंभीरता और मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी भूमिका को देखते हुए हिरासत में पूछताछ को आवश्यक माना। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 12 मई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।







