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एशिया की अधिकांश प्रस्तावित गैस परियोजनाओं से सस्ती पड़ी फर्म्ड सौर ऊर्जा, ईवी से तेल आयात बिल में सालाना 300 अरब डॉलर से अधिक की बचत संभव

सिंगापुर: ऊर्जा क्षेत्र के थिंक टैंक एम्बर (Ember) की नई विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में प्रस्तावित नई गैस आधारित बिजली क्षमता के अधिकांश हिस्से की तुलना में अब बैटरी समर्थित फर्म्ड सौर ऊर्जा अधिक सस्ती हो गई है। वहीं, क्षेत्र के सड़क परिवहन के विद्युतीकरण से तेल आयात पर सालाना 300 अरब डॉलर से अधिक की बचत संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से जीवाश्म ईंधन आपूर्ति से जुड़े नए झटकों का दौर शुरू हुआ है, जिसके बीच घरेलू स्तर पर विकसित इलेक्ट्रोटेक (Electrotech) की ओर बदलाव के लिए ये दोनों क्षेत्र एशिया के दो प्रमुख “सुपर लीवर” साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रोटेक अब केवल विकास का सबसे सस्ता विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता बढ़ाए बिना आर्थिक वृद्धि बनाए रखने का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बन गया है। आपूर्ति पक्ष पर रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में जहां नई गैस आधारित बिजली परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, उनमें से लगभग 75% स्थानों पर सौर ऊर्जा और बैटरी भंडारण का संयोजन पहले ही एलएनजी आधारित बिजली से सस्ता पड़ रहा है। अध्ययन में पाया गया कि एशिया के अधिकांश हिस्सों में चौबीसों घंटे उपलब्ध सौर-बैटरी बिजली की लागत अब 100 डॉलर प्रति मेगावाट घंटा (MWh) से कम हो गई है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सौर ऊर्जा और बैटरी का संयोजन 2030 तक पूरे एशिया में एलएनजी आधारित बिजली उत्पादन की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। एम्बर के अंतरिम प्रबंध निदेशक और रिपोर्ट के सह-लेखक आदित्य लोला ने कहा, “एशिया में बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा और बैटरियां अब एलएनजी की तुलना में कहीं अधिक उपयुक्त हैं और उनकी लागत आगे भी घटती रहेगी। मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता और कम बिजली दरों के कारण क्षेत्र के देश अपने स्वच्छ और विद्युतीकृत भविष्य का निर्माण स्वयं कर सकते हैं।”

मांग पक्ष पर रिपोर्ट ने सड़क परिवहन को इलेक्ट्रोटेक परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण साधन बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में सड़क परिवहन में उपयोग होने वाले लगभग 80% तेल का आयात किया जाता है। ऐसे में जब इलेक्ट्रिक कारें खरीद मूल्य के मामले में पेट्रोल वाहनों के बराबर पहुंच रही हैं और क्षेत्र में वाहन स्वामित्व तेजी से बढ़ने की संभावना है, तब इलेक्ट्रिक परिवहन की ओर बदलाव आयात निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एम्बर के प्रधान विश्लेषक और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डान वाल्टर ने कहा, “इलेक्ट्रिक वाहन अब रणनीतिक आवश्यकता बन चुके हैं। सड़क परिवहन एशिया के जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा स्रोत है, जिस पर हर साल 300 अरब डॉलर से अधिक खर्च होता है। अगले 20 वर्षों में एशिया अपने वाहन बेड़े का व्यापक विद्युतीकरण कर तेल आयात को आधा कर सकता है। क्षेत्र के भुगतान संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इससे बड़ा कोई दूसरा साधन नहीं है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने जैसी हालिया घटनाओं ने एशियाई देशों के लिए तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू इलेक्ट्रोटेक आधारित विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा दिया है। वर्ष 2024 में एशिया ने अपने कुल तेल का 45% और एलएनजी का लगभग 30% मध्य पूर्व से प्राप्त किया था, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले लगभग 80% तेल और गैस की अंतिम मंजिल एशियाई बाजार ही हैं।

रिपोर्ट के सह-लेखक और एम्बर के निदेशक किंग्समिल बॉन्ड ने कहा, “एशिया लंबे समय तक पुरानी वैश्विक स्थिरता व्यवस्था पर निर्भर रहा है, लेकिन लगातार तेल झटकों और होर्मुज संकट ने बदलाव की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है। पिछले पांच वर्षों में इलेक्ट्रोटेक की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। बैटरी समर्थित सौर ऊर्जा से मिलने वाली विश्वसनीय बिजली की लागत अब एशिया के अधिकांश हिस्सों में जीवाश्म ईंधनों से कम हो चुकी है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आपूर्ति और मांग दोनों स्तरों पर इलेक्ट्रोटेक का विस्तार जीवाश्म ईंधन अवसंरचना की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से किया जा सकता है। सौर ऊर्जा और बैटरी प्रणालियां कुछ दिनों में स्थापित की जा सकती हैं, जबकि नई एलएनजी आयात श्रृंखला विकसित करने में लगभग छह वर्ष और अरबों डॉलर का निवेश लग सकता है। पिछले एक दशक में इलेक्ट्रिक चूल्हों, एयर कंडीशनरों, दोपहिया वाहनों और एलईडी प्रकाश जैसी तकनीकों की कीमतों में 35% से 90% तक की गिरावट दर्ज की गई है।

वाल्टर ने कहा, “इलेक्ट्रोटेक तेज, मॉड्यूलर और उपभोक्ता-आधारित समाधान है। संकट की स्थिति में नीति निर्माता इसे तेजी से लागू कर सकते हैं और परिवार कम अतिरिक्त लागत पर क्रमिक रूप से ऊर्जा उपयोग बढ़ा सकते हैं। पाकिस्तान इसका उदाहरण है, जहां घरों और व्यवसायों ने विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को इतनी तेजी से अपनाया कि यह केंद्रीकृत योजना से आगे निकल गया।”

रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई देशों के लिए ‘इलेक्ट्रोस्टेट’ बनना समय की आवश्यकता है। वर्तमान में एशिया हर वर्ष लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर जीवाश्म ईंधन आयात पर खर्च करता है। इलेक्ट्रोटेक की ओर बदलाव से यह निवेश घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में स्थानांतरित हो सकता है। इससे व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा पर जीवाश्म ईंधन आयात का दबाव घटेगा तथा एशियाई मुद्राओं को भी मजबूती मिल सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से अधिक प्रदूषण झेल रहे एशिया के लगभग 90% लोगों के लिए वायु गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करेगा, साथ ही उन इलेक्ट्रिक उद्योगों में क्षेत्र की स्थिति मजबूत करेगा जिनकी वैश्विक मांग आने वाले दशकों में बढ़ने वाली है।

आदित्य लोला ने कहा, “एशिया के पास विकास के लिए पर्याप्त घरेलू जीवाश्म संसाधन नहीं हैं। ऊर्जा निर्भरता बढ़ाए बिना आगे बढ़ने का रास्ता इलेक्ट्रोटेक से होकर जाता है। एशिया के पास अब अपने भविष्य का निर्माण इलेक्ट्रॉनों की शक्ति पर करने का अवसर है। यदि यह वास्तव में एशिया की सदी है, तो उसका मार्ग विद्युत आधारित ही होगा।”

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