New Delhi: केंद्रीय विद्युत तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने ‘भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026’ का उद्घाटन किया। यह ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी है, जिसका आयोजन विद्युत मंत्रालय के संरक्षण में 19 से 22 मार्च 2026 तक यशोभूमि, नई दिल्ली में किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी; विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक; विद्युत मंत्रालय के सचिव श्री पंकज अग्रवाल; तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के तहत 50% संचयी गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का लक्ष्य निर्धारित समय से लगभग पाँच वर्ष पहले हासिल करने, शांति अधिनियम 2025, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, विद्युत घाटे से विद्युत अधिशेष राष्ट्र बनने, तथा सौर ऊर्जा क्षमता में 2.8 गीगावाट से बढ़कर 143 गीगावाट से अधिक तक की उल्लेखनीय वृद्धि जैसी उपलब्धियों की सराहना करते हुए, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अगले दो दशकों में लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के अभूतपूर्व निवेश अवसरों पर जोर दिया। अपने मुख्य भाषण में उन्होंने 72% तक विस्तारित होकर 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक पहुंच चुके ट्रांसमिशन नेटवर्क, वर्ष 2024-25 में 250 गीगावाट की अधिकतम मांग को पूरा करने तथा 270 गीगावाट और उससे अधिक की मांग को पूरा करने की तैयारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत को किफायती ऊर्जा के वैश्विक निर्यातक के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रयासों का उल्लेख करते हुए सीमा-पार ऊर्जा कनेक्टिविटी और समुद्र-तल ट्रांसमिशन नेटवर्क जैसी पहलों को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “आज सिर्फ एक और दिन नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन के संकल्प का दिन है। पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता से आगे बढ़ते हुए अब हम सूर्य की ऊर्जा की ओर लौट रहे हैं और एक पूर्ण चक्र पूरा कर रहे हैं। ऊर्जा विकास का केंद्र है, और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत नवाचार, वहनीयता और वैश्विक सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह ‘प्रकाश का सम्मेलन’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा नेतृत्व क्षमता को विश्व तक पहुंचाने का एक आंदोलन है।”
भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि तापीय ऊर्जा अभी भी ऊर्जा प्रणाली की रीढ़ बनी रहेगी, लेकिन दीर्घकालिक रूप से नवीकरणीय ऊर्जा ही एकमात्र टिकाऊ समाधान है। उन्होंने संतुलित ऊर्जा परिवर्तन के लिए पैमाने, गति और कौशल पर आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने बताया कि 2014 के बाद से भारत की स्थापित विद्युत क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 143 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 32 लाख से अधिक घर और 23 लाख किसान स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रहे हैं, जो सहभागितापूर्ण ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।
विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े समकालिक ग्रिडों में से एक का संचालन कर रहा है, जिसे उन्नत संतुलन प्रणाली, बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर तैनाती और मजबूत नीतिगत ढांचे का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने आगे कहा, “पिछले दशक में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हुआ परिवर्तन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो नीतिगत स्पष्टता, व्यापक पैमाने और नवाचार पर आधारित है। लगभग शून्य पीक घाटे से लेकर दुनिया के सबसे बड़े समकालिक ग्रिडों में से एक बनने तक, और सौर टैरिफ में गिरावट से लेकर स्मार्ट अवसंरचना के विस्तार तक, हम एक ऐसा तंत्र बना रहे हैं जो कुशल, विश्वसनीय और निवेश के लिए तैयार है। अगला चरण प्रौद्योगिकी, डेटा और वैश्विक साझेदारी से परिभाषित होगा।”
उद्घाटन सत्र के दौरान विद्युत मंत्रालय ने राष्ट्रीय संसाधन पर्याप्तता योजना (National Resource Adequacy Plan) सहित कई महत्वपूर्ण रणनीतिक रिपोर्ट जारी कीं, जो संतुलित ऊर्जा मिश्रण के माध्यम से भारत की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही 2035-36 तक 900 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के एकीकरण हेतु ट्रांसमिशन योजना भी प्रस्तुत की गई। इस योजना के तहत 1,37,500 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों और 8,27,600 एमवीए सबस्टेशन क्षमता के विकास की परिकल्पना की गई है, जिसमें लगभग ₹7.93 लाख करोड़ का निवेश अनुमानित है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह और ग्रिड की मजबूती सुनिश्चित होगी।
भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 विद्युत मंत्रालय और उद्योग द्वारा संचालित एक प्रमुख पहल है। इस समिट में 100 से अधिक उच्चस्तरीय सम्मेलन सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 300 से अधिक वक्ता, 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 100 से अधिक स्टार्टअप सहित 500 से अधिक प्रदर्शक और 25,000 से अधिक आगंतुक भाग लेंगे, जिससे यह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र का एक प्रमुख मंच बन गया है।







