Greater Noida: विश्वविद्यालय की शोध एवं विकास विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में महर्षि मार्कण्डेश्वर (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में “एमएम(डीयू) स्ट्रेटेजी कॉन्क्लेव : रोडमैप टू ग्लोबल एक्सीलेंस एंड टॉप रैंकिंग्स” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, संकाय सदस्यों एवं अकादमिक प्रशासकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का स्वागत संबोधन देते हुए डॉ. तरुण गुलाटी, निदेशक, आईक्यूएसी ने कहा कि वैश्विक उत्कृष्टता प्राप्त करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति और शोध पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना आवश्यक है।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) बी. श्रीधर रेड्डी, प्रो वाइस चांसलर ने किया। उन्होंने कहा कि इस रणनीति सम्मेलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय में शोध, वैश्विक दृश्यता, अकादमिक प्रतिष्ठा तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में प्रदर्शन को सुदृढ़ करने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. शीबा पक्कन, प्रोफेसर, बिब्लियोमेट्रिशियन एवं प्रमुख, रिसर्च सपोर्ट सर्विसेज, जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (जेएसएस एएचईआर), मैसूर ने शोध संस्कृति को सशक्त बनाने पर विस्तृत एवं संवादात्मक व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध और शिक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया तथा प्रतिभागियों को स्कोपस एआई और मेंडले जैसे आधुनिक शोध उपकरणों के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपकरणों की सहायता से साहित्य समीक्षा, शोध की नई संभावनाओं की पहचान, उपयुक्त शोध पत्रिकाओं का चयन तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर कुलपति डॉ. हरीश शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन शोध उत्कृष्टता, नवाचार, वैश्विक सहयोग, सामाजिक प्रभाव तथा अकादमिक प्रतिष्ठा के आधार पर किया जाता है। उन्होंने एनआईआरएफ (NIRF), क्यूएस (QS) तथा टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) जैसी वैश्विक रैंकिंग प्रणालियों का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह रणनीति सम्मेलन एमएम(डीयू) के शोध पारिस्थितिकी तंत्र, अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए ठोस एवं प्रभावी रणनीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आदेश सैनी, निदेशक, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी की सक्रिय भागीदारी से कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक, संवादात्मक और सफल रही।







