भुवनेश्वर: Pradip Kumar Das, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) ने आज भुवनेश्वर में Institute of Cost Accountants of India (ICMAI) द्वारा आयोजित ईस्टर्न इंडिया रीजनल स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस ‘ज्ञानोथान 2026’ में मुख्य वक्तव्य दिया। इस सम्मेलन में पूर्वी क्षेत्र के कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स (CMAs) ने भाग लिया।
भारत की पिछले 12 वर्षों की अक्षय ऊर्जा (RE) यात्रा पर प्रकाश डालते हुए प्रदीप कुमार दास ने कहा कि भारत की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता FY14 में 76 गीगावॉट से बढ़कर FY26 में 275 गीगावॉट हो गई है, जो 11% CAGR की वृद्धि दर्शाती है। FY26 में अकेले 54.59 गीगावॉट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा बाजार बन गया है। साथ ही, भारत ने 2030 के लक्ष्य से पांच वर्ष पहले ही 50% गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है।
उन्होंने IREDA की पिछले छह वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी की ऋण पुस्तिका FY21 में ₹27,850 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹93,051 करोड़ हो गई, जो 27% CAGR की वृद्धि है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय IREDA की नवाचार आधारित कार्य संस्कृति को दिया, जिसमें बायो एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में अग्रणी वित्तपोषण और उधारकर्ताओं के लिए टर्नअराउंड टाइम कम करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इस संस्कृति ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया है तथा अनेक पेशेवरों और असंगठित श्रमिकों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराकर समाज में मूल्य सृजन किया है।

प्रदीप कुमार दास ने दृढ़ता और संघर्ष का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि नवंबर 2023 में IREDA का IPO तीसरे प्रयास में सफल हुआ और इसे 38.8 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद नवंबर 2023 से नवंबर 2024 की अवधि में IREDA भारत की दूसरी सबसे बड़ी वैल्यू क्रिएटर कंपनी बनी तथा इस सूची में शामिल होने वाली एकमात्र PSU रही, जिसे The Economic Times ने मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सफलता असफलता से नहीं, बल्कि उससे उबरने के साहस से परिभाषित होती है।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल अंकों, डिग्री और प्लेसमेंट तक सीमित न रहें, बल्कि यह सोचें कि वे कौन-सी समस्या का समाधान कर सकते हैं, क्या मूल्य सृजित कर सकते हैं और कैसी विरासत छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन संयोग से नहीं, बल्कि बदलाव से बेहतर बनता है। उन्होंने शिक्षकों को भी याद दिलाया कि वे केवल शिक्षक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता हैं, जिनकी वास्तविक भूमिका छात्रों में सोच, चरित्र और मूल्यों का निर्माण करना है, क्योंकि एक प्रेरित छात्र पीढ़ियों को बदलने की क्षमता रखता है।
सभा को प्रेरित करते हुए पीके दास ने कहा कि दुनिया अभूतपूर्व गति से बदल रही है और युवा न केवल निर्माण, बल्कि नए राष्ट्र और समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने CMA पेशेवरों से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि योग और ध्यान IREDA की दैनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो स्पष्ट सोच और निरंतर उत्कृष्टता बनाए रखने में सहायक हैं।
‘ज्ञानोथान’ यानी ज्ञान को विवेक में परिवर्तित करने की भावना पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने ‘3C मंत्र’ — Clarity (स्पष्टता), Commitment (प्रतिबद्धता) और Conviction (दृढ़ विश्वास) — को व्यक्तिगत और संस्थागत सतत विकास के तीन स्तंभ बताया।







