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अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए ग्लोबल हीट हेल्थ इन्फॉर्मेशन नेटवर्क ने लॉन्च किया ‘South Asia Hub’

(Image courtesy: IMD)

नई दिल्ली: दक्षिण एशिया में गर्मियों के तापमान पहले से ही बढ़ रहे हैं, और विज्ञान अब वही पुष्टि करता है जिसे समुदाय वर्षों से अनुभव करते आ रहे हैं। World Meteorological Organization की हालिया प्रमुख रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में दर्ज वैश्विक तापमान मानव इतिहास में अब तक के सबसे गर्म रहे हैं। इसी कारण आज, World Health Day के अवसर पर, अग्रणी अनुसंधान, नीति और विकास संगठनों के एक समूह ने ग्लोबल हीट हेल्थ इन्फॉर्मेशन नेटवर्क (GHHIN) का नया दक्षिण एशिया हब लॉन्च किया। वेलकम द्वारा वित्तपोषित यह क्षेत्रीय हब नई दिल्ली में Council on Energy, Environment and Water (CEEW) द्वारा होस्ट किया जा रहा है।

CEEW, Sustainable Futures Collaborative (SFC), Natural Resources Defense Council (NRDC), BRAC James P. Grant School of Public Health (BRAC JPGSPH), और United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific(UNESCAP)—ये पाँच समन्वयक साझेदार—सरकार, शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और सिविल सोसाइटी के बीच समन्वय स्थापित कर साझा सीख को बढ़ावा देंगे और नीति बदलाव को दिशा देंगे।

यह हब Indian Institute for Tropical Meteorology (IITM) के साउथ एशिया क्लाइमेट एंड हेल्थ डेस्क और India Meteorological Department (IMD) के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि हीट अर्ली वार्निंग और वैज्ञानिक जानकारी का उपयोग समुदायों के लिए प्रभावी समाधान तैयार करने में किया जा सके।

ज्ञान आदान-प्रदान और श्रेष्ठ प्रथाओं के क्षेत्रीय मंच के रूप में यह हब स्थानीय हितधारकों को जोड़ेगा, नीति निर्माण में सहयोग करेगा, व्यावहारिक हस्तक्षेप लागू करेगा और विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए गर्मी से जुड़े जोखिमों को कम करेगा।

हीट साइंस से हेल्थ एक्शन की ओर

एशिया दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में दोगुनी गति से गर्म हो रहा है, और 1990 से 2021 के बीच वैश्विक स्तर पर गर्मी से होने वाली आधे से अधिक मौतें यहीं दर्ज हुईं। दक्षिण एशिया इस संकट का सबसे बड़ा भार झेल रहा है—अनुमान है कि 2030 तक यहाँ की लगभग 90% आबादी अत्यधिक गर्मी के संपर्क में होगी। इसके बावजूद, क्षेत्रीय नीति और समन्वय अक्सर बिखरे हुए हैं और अधिकांश राष्ट्रीय प्रणालियों में स्वास्थ्य-आधारित चेतावनी तंत्र का अभाव है।

भारत में ही, CEEW के शोध के अनुसार, 57% जिले—जहाँ लगभग तीन-चौथाई आबादी रहती है—उच्च से अत्यधिक हीट जोखिम का सामना कर रहे हैं। बढ़ते रात्रिकालीन तापमान और आर्द्रता से शरीर की रिकवरी क्षमता कम होती है और स्वास्थ्य प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बांग्लादेश में पिछले चार दशकों में ‘फील्ट टेम्परेचर’ 4.5°C तक बढ़ गया है। वहीं, नेपाल और भूटान जैसे हिमालयी देश भी अब नियमित रूप से 40°C से अधिक तापमान दर्ज कर रहे हैं।

हब की कार्ययोजना

अप्रैल 2026 से संचालन शुरू करने वाला यह हब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर परिवारों, श्रमिकों, स्कूलों, अस्पतालों और शहरी प्रशासन के लिए ठोस लाभ सुनिश्चित करेगा—जैसे स्पष्ट चेतावनी, सुरक्षित कार्य समय, समय पर कूलिंग उपाय और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नीति समर्थन। इसके प्रमुख फोकस क्षेत्र होंगे:

  • दक्षिण एशिया में संस्थानों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का नेटवर्क तैयार करना
  • विज्ञान को नीति में बदलना और पायलट परियोजनाओं के माध्यम से निर्णय-आधारित कार्यवाही
  • हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना
  • सफल मॉडलों का दस्तावेजीकरण और विस्तार

आने वाले वर्षों में यह हब 60 से अधिक संस्थानों को जोड़ने, 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करने और पूरे दक्षिण एशिया में हीट एक्शन प्लान को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।

दक्षिण एशिया हीट एंड हेल्थ हब की अध्यक्षता CEEW के फेलो Dr Vishwas Chitale करेंगे, जिन्होंने भारत में जिला स्तर पर हीट जोखिम आकलन और एक्शन प्लानिंग पर अग्रणी कार्य किया है।

CEEW के सीईओ Dr Arunabha Ghosh ने कहा कि अत्यधिक गर्मी केवल मौसमी खतरा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक उत्पादकता और बुनियादी ढांचे के लिए एक व्यापक जोखिम है।

GHHIN के समन्वयक Alejandro Saez Reale ने कहा कि यह हब वैश्विक नेटवर्क के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे दक्षिण एशिया को विज्ञान, उपकरणों और ज्ञान तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

WHO-WMO क्लाइमेट एंड हेल्थ जॉइंट प्रोग्राम की Dr Joy Shumake-Guillemot ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अधिक तीव्र और बार-बार आने वाली गर्मी को बढ़ा रहा है, जिसका पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की प्रभारी Dr Catharina Cora Boehme ने कहा कि अत्यधिक गर्मी हमारे समय के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है और विज्ञान व स्वास्थ्य कार्रवाई के बीच मजबूत संबंध बनाना बेहद जरूरी है।

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