नई दिल्ली: University of Liverpool परिसर और Indian Institute of Technology Delhi (आईआईटी दिल्ली) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों संस्थान शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं को तलाशने और प्राथमिकता वाले प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग क्षेत्रों में शोध साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हुए हैं।
इस MoU पर Professor Tariq Ali, प्रो-वाइस-चांसलर (ग्लोबल एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप्स), यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, और Professor Anil Verma, डीन (अंतरराष्ट्रीय संबंध), आईआईटी दिल्ली ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच वैश्विक शोध सहयोग के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है, जिसमें क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल डिवाइस एवं डायग्नोस्टिक्स, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उच्च प्रभाव वाले प्राथमिकता क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
यह सहयोग यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के फैकल्टी प्रतिनिधिमंडल की आईआईटी दिल्ली यात्रा के बाद आगे बढ़ा। इस दौरान आयोजित आधे दिन के एक विशेष सत्र में आईआईटी दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग, कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज और सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के संकाय सदस्य शामिल हुए, जिससे सार्थक शैक्षणिक और शोध साझेदारी की नींव रखी गई।
इस सहयोग पर बोलते हुए Professor Tariq Ali ने कहा, “आईआईटी दिल्ली के साथ हमारी साझेदारी दो शोध-प्रधान संस्थानों की ताकतों को एक साथ लाने का एक रोमांचक अवसर है, जो ज्ञान और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आईआईटी दिल्ली की विज्ञान, इंजीनियरिंग और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रतिष्ठा है और हम एक संयुक्त सीड फंड स्थापित करने को लेकर बेहद प्रसन्न हैं, जो नई पहलों को गति देगा। हम क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं का पता लगाएंगे। मुझे विश्वास है कि साथ मिलकर काम करने से हम न केवल वैज्ञानिक खोज को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि आज दुनिया के सामने मौजूद महत्वपूर्ण तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने में भी योगदान देंगे।”
Professor Anil Verma ने कहा, “आईआईटी दिल्ली में हम मानते हैं कि वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियां शोध और नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के साथ हमारा सहयोग पूरक क्षमताओं और साझा महत्वाकांक्षाओं को एक साथ लाता है, जिससे शोध जुड़ाव को गहरा करने और प्रभाव के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी। हम संयुक्त शोध और नवाचार पहलों के लिए एक मजबूत मंच तैयार करने की दिशा में अग्रसर हैं, जो दोनों संस्थानों के लिए सार्थक प्रभाव उत्पन्न करेगा और भारत एवं यूके की साझा चुनौतियों का समाधान करेगा।”
इस समझौते के माध्यम से दोनों संस्थान अपनी पूरक शोध क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए संयुक्त रूप से अवसरों की पहचान करेंगे, जिससे नए शोध और नवाचार परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा और भारत–यूके शैक्षणिक सहयोग और मजबूत होगा।
यह साझेदारी दोनों संस्थानों के संकाय और शोध टीमों के बीच सतत शैक्षणिक सहभागिता और सहयोगात्मक शोध पहलों के लिए एक सशक्त मंच तैयार करने की उम्मीद है।







