Greater Noida: आयुष मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न संस्थानों, जिनमें राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) भी शामिल है, के विशेषज्ञों ने औषधीय पौधों की गुणवत्ता और उनकी पूरी यात्रा को खेत के स्तर (फार्म-गेट) से लेकर संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला तक निगरानी, सत्यापन और प्रलेखन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं संबंधित प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आह्वान किया है। यह आह्वान “फार्म-गेट पर औषधीय पौधों की गुणवत्ता आकलन के लिए उपकरणों की डिजाइन और विकास” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में किया गया। यह संगोष्ठी 8–9 जनवरी 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में आयोजित हुई, जिसने भारत के औषधीय पादप क्षेत्र में मूल स्रोत पर सुनिश्चित गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और कच्चे माल के मानकीकरण पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित किया।
इस संगोष्ठी में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया और आयुष एवं औषधीय पादप पारिस्थितिकी तंत्र की सतत वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की नींव के रूप में फार्म-गेट गुणवत्ता प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया।
संगोष्ठी का उद्घाटन NMPB के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. डॉ. महेश कुमार दाधिच और आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) की निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी के मुख्य भाषणों के साथ हुआ। उनके संबोधनों ने गुणवत्ता-आधारित विकास के लिए राष्ट्रीय नीति और वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया तथा नवाचार, विनियमन और पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारतीय औषधीय पादप कच्चे माल पर वैश्विक विश्वास को मजबूत किया जा सके।
पहले दिन के तकनीकी सत्रों में औषधीय पादप मूल्य श्रृंखला के सभी पहलुओं पर चर्चा की गई—जिसमें सतत खेती और पुनर्योजी कृषि से लेकर AI-सक्षम गुणवत्ता आकलन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण शामिल था। ICAR–औषधीय एवं सगंध पौध अनुसंधान निदेशालय (DMAPR), IIT दिल्ली, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), आयुष मंत्रालय, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), हिमालय वेलनेस और हर्बलस्केप क्रॉप्स के विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित जानकारियां और मैदानी अनुभव साझा किए।
चर्चाओं में यह रेखांकित किया गया कि भारत तकनीकी और संस्थागत दोनों स्तरों पर AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल फेनोटाइपिंग और एकीकृत गुणवत्ता ढांचों को अपनाने के लिए तैयार है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय औषधीय पादप कच्चे माल की विश्वसनीयता और सुदृढ़ होगी।
दूसरा दिन रोडमैप तैयार करने के लिए समर्पित रहा, जिसमें दो संरचित विशेषज्ञ मंथन सत्र आयोजित किए गए—भारतीय औषधीय पादप उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण तथा आपूर्ति-श्रृंखला में पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी के लिए ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का उपयोग।
इन सत्रों में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि फार्म-गेट पर डिजिटल उपकरण—जैसे पोर्टेबल गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, AI-सक्षम निर्णय सहायता प्रणालियां और ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसबिलिटी प्लेटफॉर्म—अब विकल्प नहीं, बल्कि भारतीय हर्बल कच्चे माल की प्रामाणिकता, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं।
संगोष्ठी से NMPB और आयुष मंत्रालय के उद्देश्यों के अनुरूप स्पष्ट और व्यावहारिक निष्कर्ष सामने आए। इसने नीति संस्थानों, वैज्ञानिक निकायों, उद्योग हितधारकों और वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों के बीच दुर्लभ राष्ट्रीय स्तर का समन्वय स्थापित किया, जिससे बिखरे हुए प्रयासों के बजाय एकीकृत समाधान को बढ़ावा मिला।
प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता का निर्माण मूल स्रोत पर ही होना चाहिए, जो प्राथमिक उत्पादकों और संग्राहकों को सशक्त बनाने के NMPB के दायित्व का प्रत्यक्ष समर्थन करता है। चर्चाओं में मिलावट, गुणवत्ता में असंगति और किसानों के नुकसान को कम करने के लिए AI और डिजिटल उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की पुष्टि हुई, साथ ही निर्यात और फार्माकोपियल अनुपालन के लिए ब्लॉकचेन-सक्षम एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी की महत्वपूर्ण भूमिका भी रेखांकित की गई।
संगोष्ठी में वृक्ष आयुर्वेद जैसी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण ढांचों के साथ एकीकृत करने पर भी प्रकाश डाला गया, जिससे यह प्रदर्शित हुआ कि भारत की विरासत को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित और डिजिटल रूप में प्रस्तुत कर वैश्विक स्वीकार्यता को मजबूत किया जा सकता है। क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को उन्नत उपकरणों, मानकों और उभरती नीति दिशाओं की जानकारी मिली।
यह संगोष्ठी AI-सक्षम, ट्रेस करने योग्य और मानकीकृत औषधीय पादप आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती है। इसके निष्कर्ष आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रत्यक्ष समर्थन करते हैं, साथ ही वैश्विक आयुष क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करते हैं।
चर्चाओं में NMPB समर्थित पहलों के अंतर्गत पायलट परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी तैनाती और किसान-स्तरीय क्षमता निर्माण के लिए निरंतर और विस्तारित समर्थन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया, जिससे फार्म-गेट गुणवत्ता को भारत की औषधीय पादप अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनाया जा सके।








