नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के लिए नियामकीय रिपोर्टिंग ढांचे को तर्कसंगत बनाते हुए इसमें संशोधन किया है। नए ढांचे के तहत तिमाही रिपोर्टिंग को सरल किया गया है, जबकि विस्तृत खुलासों को वार्षिक रिपोर्टिंग में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस सुधार से AIF प्रबंधकों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है, साथ ही सेबी को निगरानी और नीति निर्माण के लिए व्यापक डेटा मिलता रहेगा।
यह कदम नियामक और उद्योग हितधारकों के बीच कई महीनों तक चली बातचीत के बाद उठाया गया है। इस दौरान इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (IVCA) ने अपनी नियामकीय समितियों और कार्य समूहों के माध्यम से सेबी के साथ मिलकर AIF प्रबंधकों की ओर से पहले के रिपोर्टिंग ढांचे की जटिलताओं पर फीडबैक साझा किया। इन चर्चाओं ने एक संतुलित रिपोर्टिंग संरचना तैयार करने में मदद की, जो नियामकीय पारदर्शिता बनाए रखते हुए उद्योग के लिए बार-बार होने वाली रिपोर्टिंग की आवश्यकता को कम करती है।
संशोधित ढांचे के तहत अब AIFs को सीमित तिमाही गतिविधि रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें केवल आवश्यक निगरानी संबंधी जानकारी शामिल होगी। वहीं स्कीम-स्तर, निवेशक-स्तर और पोर्टफोलियो-स्तर के विस्तृत खुलासे प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में प्रस्तुत की जाने वाली वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट के माध्यम से जमा किए जाएंगे।
पहली वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए दाखिल की जाएगी, जबकि संशोधित तिमाही रिपोर्टिंग प्रारूप जून 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही से लागू होगा। मार्च तिमाही के लिए अलग से तिमाही फाइलिंग की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि संबंधित जानकारी वार्षिक रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।
इस पर टिप्पणी करते हुए IVCA के संस्थापक साझेदार, सीएफओ और सह-अध्यक्ष (रेगुलेटरी अफेयर्स कमेटी) सिद्धार्थ पाई ने कहा, “सेबी द्वारा AIFs की रिपोर्टिंग पर जारी हालिया सर्कुलर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में एक बड़ा सुधार है। यह प्रारूप सेबी और AIF उद्योग द्वारा मिलकर तैयार किया गया है, जिसमें नियामकीय आवश्यकताओं और AIFs की अनुपालन जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाया गया है। उद्योग के साथ मिलकर नियम तैयार करना अब सेबी की नियामकीय प्रक्रिया की एक विशेषता बन गया है। AIF परिसंपत्तियों और यूनिट्स के डिमैटेरियलाइजेशन के कारण भी यह संभव हुआ है, जिससे सेबी बाजार अवसंरचना का उपयोग कर AIF गतिविधियों की निगरानी कर सकता है। उद्योग सेबी की दूरदर्शिता की सराहना करता है।”
नया ढांचा AIF प्रबंधकों के लिए नियमित रिपोर्टिंग से जुड़ी संचालन संबंधी जटिलताओं को काफी हद तक कम करेगा, खासकर डेटा समेकन, आंतरिक समन्वय और तिमाही अनुपालन से जुड़े सिस्टम तैयार करने जैसे क्षेत्रों में।
IVCA जल्द ही स्टैंडर्ड्स फोरम वेबसाइट पर अद्यतन रिपोर्टिंग प्रारूप प्रकाशित करेगा और AIFs तथा उनके प्रबंधकों को संशोधित आवश्यकताओं को समझने में सहायता करेगा, ताकि नई व्यवस्था का सुचारू क्रियान्वयन और समय पर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।







