ग्रेटर नोएडा: भारत की राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) देश की भविष्य की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए विदेशी बाजारों में दुर्लभ खनिजों के अधिग्रहण की तैयारी कर रही है, सूत्रों ने बताया।
दुर्लभ खनिज आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं, लेकिन उनकी आपूर्ति बाधित होने का जोखिम अधिक रहता है। प्रमुख दुर्लभ खनिजों में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), ग्रेफाइट और तांबा शामिल हैं। ये खनिज बहुत कम देशों में केंद्रित हैं और आधुनिक तकनीकों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा काफी हद तक इन्हीं खनिजों पर निर्भर करती है।
भारत के लिए दुर्लभ खनिज क्यों जरूरी हैं?
ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रिक वाहन
हम इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं और ईवी बैटरियों के लिए लिथियम, कोबाल्ट और निकेल आवश्यक हैं।
सोलर पैनल, पवन टरबाइन और बैटरी स्टोरेज प्रणालियों के लिए रेयर अर्थ तत्वों और तांबे की जरूरत होती है।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिससे ये खनिज नीतिगत योजना के केंद्र में आ गए हैं।
रक्षा और रणनीतिक सुरक्षा
इनका उपयोग मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, रडार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है।
सेमीकंडक्टर निर्माण और संचार प्रणालियों के लिए भी ये आवश्यक हैं।
ये रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।







