Bharat Neeti

भारत नीति

Be Ahead With Economy And Policy Updates

भारत नीति

Be Ahead With Economy And Policy Updates

विकास की नई लकीर बनाने के लिए तैयार भारत का बीमा बाजार, अन्य देशों की तुलना में भारत में बीमा क्षेत्र में तेज विकास का अनुमान

(Image Courtesy: Swiss Re)

Mumbai: भारत का बीमा क्षेत्र मध्यम अवधि में तेज विकास के नए युग में कदम रखने जा रहा है। वृहद आर्थिक मोर्चे पर मजबूत आधार और उपभोक्ताओं की ओर से बढ़ती मांग से इस विकास को गति मिलेगी। ‘स्विस री’ के विश्लेषण ‘इंडियाज इकोनॉमिक एंड इंश्योरेंस मार्केट आउटलुक 2026-30: रेजिलिएंट एंड राइजिंग एमिड ग्लोबल शिफ्ट्स’ (भारतीय आर्थिक एवं बीमा बाजार परिदृश्य 2026-2030: वैश्विक बदलावों के बीच मजबूत एवं उभरता हुआ बाजार) में यह बात सामने आई है। मिड-टर्म में वार्षिक प्रीमियम में 2026 से 2030 के दौरान 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी का अनुमान है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत सबसे मजबूत उभरता हुआ बीमा बाजार बनकर सामने आएगा।

‘स्विस री’ में भारत के मार्केट हेड अमिताभ रे ने कहा, ‘मिड-टर्म में बीमा क्षेत्र में विकास के हिसाब से भारत मजबूत स्थिति में है, क्योंकि यहां नए अवसर सामने आ रहे हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य और वाहन बीमा क्षेत्र में। हम भविष्य को ध्यान में रखकर किए गए नियामकीय सुधार, डिजिटल इनोवेशन और उपभोक्ताओं के लिए अनुशासित एवं आकर्षक प्रोडक्ट मिक्स का फायदा लेने के लिए तैयार हैं। बीमा क्षेत्र में विकास से भारत को व्यापक लाभ होगा, क्योंकि यह फाइनेंशियल शॉक एब्जॉर्बर के रूप में लाखों भारतीय परिवारों एवं कारोबारियों को वित्तीय झटके से बचाने का माध्यम है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती लागत और उम्रदराज होती पीढ़ी पर वित्तीय दबाव के कारण संकट लगातार बढ़ रहा है।’

अगले पांच साल में औसतन 6.5 प्रतिशत की सालाना दर से भारत के वास्तविक जीडीपी में विकास की उम्मीद है। इस वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। भारत की विकास की कहानी निजी स्तर पर बढ़ते उपभोग से जुड़ी है, जहां वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों के सरलीकरण और व्यक्तिगत आयकर में छूट जैसे वित्तीय राहत के कदमों से निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों में मांग बढ़ाने में मदद मिल रही है। भारत में बुनियादी ढांचे में निवेश को दर्शाने वाले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में भी वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। साथ ही फंडिंग की लागत कम होने, कॉरपोरेट बैलेंस शीट मजबूत होने और उपभोग में लचीलेपन से प्राइवेट कैपेक्स में भी बढ़ोतरी का अनुमान है। यहां विकास पर अमेरिकी टैरिफ से सीधा प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, क्योंकि भारत से अमेरिका में होने वाले वस्तुओं के निर्यात की भारत की जीडीपी में मात्र 2 प्रतिशत हिस्सेदारी है। साथ ही मौद्रिक एवं संयमित वित्तीय नीति से भी किसी तरह के नकारात्मक प्रभाव से बचने में मदद मिलेगी।

‘स्विस री’ इंस्टीट्यूट में हेड ऑफ इंश्योरेंस मार्केट एनालिसिस महेश एच पुतैया ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था एक ब्राइट स्पॉट बनी हुई है। बड़ा उपभोक्ता आधार, स्थिर महंगाई दर और वित्तीय विवेक से यहां की अर्थव्यवस्था वैश्विक अस्थिरता से बची रहेगी। इसका प्रभाव बीमा प्रीमियम के विकास में नजर आएगा। भारत मिड-टर्म में मजबूत विकास के लिए तैयार है।’
रेगुलेशन और इनोवेशन से बीमा क्षेत्र में विकास को मिल रहा बढ़ावा ‘स्विस री’ ने अनुमान जताया है कि भारत का बीमा बाजार 2026 से 2030 के बीच रियल टर्म्स में सालाना 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। यह अन्य बड़े उभरते एवं उन्नत बीमा बाजारों से ज्यादा की विकास दर है। उदाहरण के तौर पर, चीन के बीमा क्षेत्र में इसी अवधि में करीब 4 प्रतिशत और अमेरिका के बीमा क्षेत्र में 2 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है।

भारतीय बीमा बाजार में 2025 में मात्र 3.1% की धीमी वृद्धि को देखते हुए यह अनुमान मजबूत वापसी का संकेत है, क्योंकि बाजार अब नए नियमों के अनुरूप ढल गया है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) द्वारा किए गए सुधार और सरकार द्वारा किए गए व्यापक नीतिगत बदलावों से पारदर्शिता बढ़ी है और तेज विकास के अगले चरण में उद्योग की संरचना को नया आकार मिल रहा है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाना, वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार जैसे कदम इन बदलावों का हिस्सा हैं। इन बदलावों से नई पूंजी आ सकती है, बीमा तक पहुंच बढ़ सकती है और मांग में वृद्धि हो सकती है।

जीवन बीमा के क्षेत्र में अगले 5 वर्षों में 6.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है। जीवन बीमा के मामले में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। वितरण नेटवर्क के विस्तार, रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग और क्रेडिट ग्रोथ के दम पर यह वृद्धि होगी।
निकट भविष्य में रेगुलेटरी शिफ्ट और मेडिकल इन्फ्लेशन के कारण नॉन-लाइफ मार्केट को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन मिड-टर्म में विकास में सुधार होगा। स्वास्थ्य बीमा में 2026-2030 के दौरान औसतन 7.2 प्रतिशत सालाना की दर से वृद्धि की उम्मीद है। वाहनों की बढ़ती मांग के कारण वाहन बीमा में इसी अवधि में 7.5 प्रतिशत सालाना की वृद्धि होगी।

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला वाला नुकसान और एसेट रिस्क बढ़ा भारत में प्राकृतिक आपदाओं और तेजी से बढ़ते एसेट एक्सपोजर के बीच टकराव हो रहा है।

‘स्विस री’ के अनुमान के अनुसार देशभर में लगभग 26 से 29 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स जोखिम में हैं। इनमें से कुछ एसेट्स प्राकृतिक आपदाओं वाले प्रमुख क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां हाई एसेट कंसन्ट्रेशन कई तरह के जोखिम से जुड़ा है। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा राष्ट्रीय आर्थिक विकास को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। इसलिए, आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए रिस्क ट्रांसफर करने और राजकोषीय बोझ कम करने के लिए रीइंश्योरेंस कवरेज का विस्तार करना आवश्यक है। साथ ही, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, क्लाइमेट रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और भवन निर्माण संहिता (बिल्डिंग कोड) में सख्त प्रवर्तन में निवेश करना भी जरूरी है, खासकर तेज शहरीकरण वाले और तटीय क्षेत्रों में।

स्विस आरई के क्लाइंट अंडरराइटिंग इंडिया के प्रमुख परविंदर सिंह कहते हैं, “वैश्विक अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदा के बढ़ते जोखिमों से निपटते समय विवेकपूर्ण अंडरराइटिंग और टिकाऊ समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना भारत के प्रोटेक्शन गैप को मजबूत करने और हमारे ग्राहकों एवं समाज के लिए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की कुंजी होगी।”

You are warmly welcomed to India’s first On-Demand News Platform. We are dedicated to fostering a democracy that encourage diverse opinions and are committed to publishing news for all segments of the society. If you believe certain issues or news stories are overlooked by mainstream media, please write to us. We will ensure your news is published on our platform. Your support would be greatly appreciated if you could provide any relevant facts, images, or videos related to your issue.

Contact Form

Newsletter

Follow Us

Related News