ग्रेटर नोएडा: टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के फेज़-1 का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा कर लिया है। इसके साथ ही भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे और देश के पहले ‘नेट-ज़ीरो उत्सर्जन’ वाले हवाई अड्डे का निर्माण 28 मार्च 2026 को इसके वाणिज्यिक शुभारंभ से पहले ही पूरा हो गया है।
यह हवाई अड्डा यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है, जो ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रणनीतिक रूप से स्थित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विमानन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में आर्थिक विकास, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और शहरी विस्तार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
फेज़-1 में टर्मिनल-1 शामिल है, जिसका क्षेत्रफल 1 लाख वर्ग मीटर से अधिक है और इसे सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें यात्रियों की सुगम प्रक्रिया के लिए उन्नत डिजिटल प्रणालियाँ भी शामिल हैं। हवाई अड्डे में 3,900 मीटर लंबा रनवे है, जो वाइड-बॉडी विमानों को संभालने में सक्षम है, साथ ही एक आधुनिक कार्गो टर्मिनल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और व्यापक एयरसाइड व लैंडसाइड अवसंरचना भी विकसित की गई है।
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित टर्मिनल की वास्तुकला में यमुना नदी से प्रेरित विशिष्ट लहरदार छत, पारंपरिक हवेलियों की झलक दिखाता अग्रभाग (फोरकोर्ट) और क्षेत्रीय कला, वस्त्र व हस्तशिल्प से सुसज्जित आंतरिक सज्जा शामिल है।

विनायक पाई, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने कहा: “नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूर्ण होना भारत की अवसंरचना यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह सटीकता, व्यापक पैमाने और सततता के साथ राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को पूरा करने की हमारी क्षमता को दर्शाता है। यह परियोजना इस बात का भी उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे टाटा समूह की विभिन्न कंपनियाँ एक साथ आईं और इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रणालियों तथा परियोजना क्रियान्वयन में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देकर वैश्विक मानकों के अनुरूप एक एकीकृत अवसंरचना परिसंपत्ति तैयार की। यह सहयोगात्मक क्रियान्वयन के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में समूह की ताकत का सशक्त प्रदर्शन है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत के पहले ‘नेट-ज़ीरो उत्सर्जन’ वाले हवाई अड्डे के रूप में यह विकास सतत अवसंरचना के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसे 1,00,000 से अधिक कर्मियों द्वारा 8.5 करोड़ से अधिक सुरक्षित मानव-घंटों के साथ हासिल किया गया है। हमें यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल के साथ साझेदारी कर एक भविष्य-तैयार विमानन केंद्र विकसित करने पर गर्व है, जो क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगा, आर्थिक विकास को गति देगा और भारत की दीर्घकालिक अवसंरचना दृष्टि में सार्थक योगदान देगा।”
यह हवाई अड्डा यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से सुगम संपर्क प्रदान करता है और भविष्य में मेट्रो सहित बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क से भी जुड़ा होगा। दीर्घकालिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया यह हवाई अड्डा अंततः सालाना 7 करोड़ यात्रियों की सेवा करेगा, जिसके लिए दो रनवे, विस्तारित टर्मिनल क्षमता और समर्पित विमान रखरखाव सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।
भारत के पहले ‘नेट-ज़ीरो उत्सर्जन’ वाले हवाई अड्डे के रूप में इस परियोजना में सौर और पवन ऊर्जा, वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ और टिकाऊ निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे विकास के हर पहलू में पर्यावरणीय जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है।
टाटा प्रोजेक्ट्स के ईपीसी कार्यक्षेत्र में टर्मिनल भवन, रनवे, एयरसाइड और लैंडसाइड अवसंरचना, सड़कें, उपयोगिताएँ, कार्गो टर्मिनल, एटीसी टावर और सहायक सुविधाओं का निर्माण शामिल था।
नियामकीय स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के बाद नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अब वाणिज्यिक संचालन के लिए तैयार है, जो जटिल और बड़े पैमाने की अवसंरचना परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में टाटा प्रोजेक्ट्स की अग्रणी ईपीसी कंपनी के रूप में स्थिति को और मजबूत करता है, जो भारत की विकास आकांक्षाओं को समर्थन देती है।







