दोहा, कतर: ग्लोबल साउथ का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्बन मानक ग्लोबल कार्बन काउंसिल (GCC) और सतत विकास के लिए समर्पित भारत की अग्रणी गैर-लाभकारी शोध संस्था द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत TERI के प्रमुख कार्यक्रम LaBL 2.0 – लाइटिंग अ बिलियन लाइवलीहुड्स के अंतर्गत घरेलू और आजीविका आधारित स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारत का पहला डिजिटल कार्बन मार्केटप्लेस स्थापित किया जाएगा।
इस MoU पर GCC के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. यूसुफ अलहोर और TERI की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने हस्ताक्षर किए। यह रणनीतिक साझेदारी भारत के ग्रामीण और वंचित समुदायों में सौर प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ खाना पकाने की तकनीक और उत्पादक उपयोग वाले उपकरणोंजैसे डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) समाधानों के लिए कार्बन फाइनेंस को सक्षम बनाने के उद्देश्य से की गई है।
यह सहयोग सामुदायिक स्तर की परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों में भागीदारी का नया मार्ग प्रदान करेगा। इसके तहत छोटे पैमाने पर घरेलू स्तर पर किए जाने वाले जलवायु कार्यों को मापने योग्य, सत्यापित और व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे गरीब समुदायों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं को कार्बन फाइनेंस उपलब्ध हो सकेगा।
भारत की स्वच्छ ऊर्जा और आजीविका चुनौती
हालांकि भारत ने 2025 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधनोंसे प्राप्त किया और पेरिस समझौते के तहत अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले प्राप्त कर लिया, फिर भी देश में 25 करोड़ से अधिक लोग अभी भी स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा समाधान से वंचित हैं।
ऐसे में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा देश के ऊर्जा परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है, जो जलवायु परिवर्तन को कम करने के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देती है।
LaBL 2.0 परियोजनाओं को GCC के वैश्विक कार्बन बाजार ढांचे से जोड़कर यह साझेदारी छोटे घरेलू और आजीविका आधारित हस्तक्षेपों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने में सक्षम बनाएगी। इससे रोजमर्रा के स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को जलवायु संपत्ति (क्लाइमेट एसेट) में बदला जा सकेगा और ग्रामीण तथा सामुदायिक ऊर्जा परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।
समुदायों के लिए डिजिटल कार्बन मार्केटप्लेस का निर्माण
इस MoU के तहत GCC और TERI मिलकर पूरी तरह डिजिटल एनर्जी एक्सेस और कार्बन मार्केटप्लेस विकसित करने या LaBL 2.0 परियोजनाओं को विश्व बैंक समर्थित GCC के ASCENT एनर्जी एक्सेस पोर्टल से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे।
यह प्लेटफॉर्म घरेलू और छोटे व्यवसायों की परियोजनाओं को एकत्रित कर डिजिटल MRV (मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन) प्रणालियों के माध्यम से कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने में सक्षम बनाएगा। इससे लेन-देन लागत कम होगी और उच्च दक्षता, पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और पर्यावरणीय अखंडता सुनिश्चित होगी।
इस पहल में भारत के प्रमुख सरकारी संस्थानों के साथ संरचित संवाद भी शामिल होगा, ताकि LaBL 2.0 कार्बन क्रेडिट को अनुपालन कार्बन बाजारों, जैसे आर्टिकल 6.2, के तहत संभावित मान्यता दिलाने की संभावना का पता लगाया जा सके।
राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन और क्षमता निर्माण
LaBL 2.0 के तहत भारत में एनर्जी एक्सेस प्रोग्राम के लिए TERI राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। GCC और TERI संयुक्त रूप से कार्यक्रम का संचालन करेंगे और भाग लेने वाले परिवारों तथा सूक्ष्म उद्यमों के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियां आयोजित करेंगे।
इन पहलों के माध्यम से समुदायों को परियोजनाओं को लागू करने, कार्बन बाजारों में भाग लेने और स्वच्छ ऊर्जा एवं आजीविका कार्यक्रमों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और उपकरण प्रदान किए जाएंगे।
ग्लोबल कार्बन काउंसिल के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. यूसुफ अलहोर ने कहा, “TERI के साथ हमारी साझेदारी कार्बन बाजारों को जमीनी स्तर के लोगों के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। GCC के डिजिटल कार्बन मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और ASCENT एनर्जी एक्सेस पोर्टल को TERI की ऊर्जा पहुंच और आजीविका क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ जोड़कर हम एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहे हैं जो घरेलू स्वच्छ ऊर्जा कार्यों को सत्यापित जलवायु संपत्तियों में बदल सके। यह पहल दिखाती है कि डिजिटल और कुशल कार्बन बाजार समाज के निचले तबकों में आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, साथ ही पर्यावरणीय मानकों को भी बनाए रखते हैं।”
TERI की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा, “LaBL 2.0 ऊर्जा पहुंच से आगे बढ़कर ऊर्जा-संचालित आजीविकाओं को बढ़ावा देने के TERI के संकल्प को दर्शाता है। GCC के साथ इस सहयोग के माध्यम से हमारा लक्ष्य कार्बन फाइनेंस को महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों, ग्रामीण सूक्ष्म उद्योगों और सामुदायिक बुनियादी ढांचे तक पहुंचाना है, ताकि जलवायु कार्रवाई का सीधा सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सके। यह साझेदारी भारत को लोगों-केंद्रित कार्बन बाजार नवाचार में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में मदद करेगी।”
पारदर्शिता और प्रभाव के साथ तकनीक
यह पहल GCC के डिजिटल ASCENT एनर्जी एक्सेस पोर्टल और कार्बन मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर (CMI) पर आधारित होगी, जो परियोजना पंजीकरण से लेकर कार्बन क्रेडिट के जारी होने, हस्तांतरण और सेवानिवृत्ति तक पारदर्शी लेखांकन सुनिश्चित करेगी। इससे डबल काउंटिंग रोकी जा सकेगी और पर्यावरणीय व सामाजिक अखंडता सुरक्षित रहेगी।
विकेन्द्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा को कार्बन फाइनेंस से जोड़कर यह कार्यक्रम निम्नलिखित लाभ प्रदान करने की उम्मीद करता है:
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ग्रामीण ऊर्जा परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार
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परिवारों और सूक्ष्म उद्यमों के लिए नए आय स्रोत
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महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका पहलों को समर्थन
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वैश्विक जलवायु शमन प्रयासों में भारत के योगदान को मजबूत करना
ग्लोबल साउथ के लिए एक मॉडल
भारत से आगे बढ़ते हुए GCC-TERI सहयोग को अन्य विकासशील देशों के लिए भी दोहराने योग्य मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि वे डिजिटल प्रणालियों और उच्च मानकों के माध्यम से घरेलू स्तर की जलवायु कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों से जोड़ सकें।
जैसे-जैसे देश जलवायु शमन और विकास प्राथमिकताओं को एक साथ आगे बढ़ाने के समाधान तलाश रहे हैं, यह साझेदारी एक नया मानक स्थापित करती है कि कार्बन बाजार केवल कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि समुदायों के लिए भी काम कर सकते हैं।







